नयी दिल्ली , मई 16 -- भारत ने सिंधु जल संधि के संबंध में फैसला सुनाने वाले तथाकथित मध्यस्थता न्यायाधिकरण को अवैध बताते हुए उसके फैसले को खारिज कर दिया है।
भारत ने इस संबंध में अपने पहले के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा है कि उसने इस तथाकथित न्यायाधिकरण को कभी मान्यता नहीं दी है इसलिए इसके द्वारा सुनाये गये फैसले अवैध हैं। भारत ने जोर देकर कहा है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय अभी भी बरकरार है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले से संबंधित मीडिया के प्रश्नों के जवाब में शनिवार को कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 15 मई को एक " फैसला " दिया है, जिसे इसने सिंधु जल संधि के सामान्य व्याख्या के मुद्दों पर पहले जारी फैसले के पूरक के रूप में "अधिकतम जलाशय" से संबंधित बताया है।
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