जिनेवा , जून 24 -- भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक विशेष बैठक में अपनी बात मजबूती से रखते हुए पाकिस्तान को इस मंच का उपयोग राजनीति के लिए करने के लिए फटकार लगायी है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने 'अरिया-फॉर्मूला बैठक' में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के 'अध्याय छह' और 'अध्याय सात' के अंतर को स्पष्ट करते हुये बताया कि एक तरफ जहां 'अध्याय सात' के नियम खास तरह के सुरक्षा संकट से निपटने के लिए होते हैं। उन्होंने कहा कि इन नियमों सही समय और सही माहौल में लागू न किया जाए, तो इनका कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों पर तुरंत कदम न उठाने से दुनिया की शांति और सुरक्षा को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, 'अध्याय छह' के नियम अलग तरह से काम करते हैं, इसके तहत आपसी विवादों को शांति से सुलझाने के लिए बातचीत, जांच-पड़ताल, मध्यस्थता और आपसी समझौते जैसे तरीके दिए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन तरीकों को अपनाते समय संबंधित देशों के बीच पहले से चल रही द्विपक्षीय (आपसी) बातचीत का सम्मान किया जाना चाहिए। इन्हें हमेशा के लिए थोपा हुआ नियम मानने के बजाय बदलती परिस्थितियों के हिसाब से देखना चाहिए।
श्री हरिश ने 'कार्यान्वयन के अंतर को पाटना: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा का रखरखाव' विषय के तहत आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के रवैये पर सख्त आपत्ति जतायी। पाकिस्तान इस बैठक का सह-अध्यक्ष था, फिर भी उसने राजनीतिक मुद्दे उठाने शुरू कर दिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने इसे बेहद हैरान करने वाला बताया और कहा कि जिस सह-अध्यक्ष से निष्पक्ष रहने की उम्मीद थी, उसने राजनीति से प्रेरित बातें करना चुना। उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए साफ कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का आंतरिक मामला रहा है, है और रहेगा। बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तान की इस हरकत की आलोचना की।
इस मुद्दे पर अलग से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी पाकिस्तानी नेताओं के बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने देश के अंदरूनी संकट और मानवाधिकारों की खराब स्थिति से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहा है।
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