नयी दिल्ली , अगस्त 25 -- स्वीडन के स्टॉकहोम में चल रहे वर्ल्ड वॉटर वीक 2026 में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से शामिल होते हुए संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने "नेशनल इनिशिएटिव ऑन वॉटर सिक्योरिटी: ट्रांसलेटिंग नेशनल वॉटर विज़न्स टू रियलिटी: व्हाट वर्क्स?" शीर्षक वाले सत्र में ज़मीनी स्तर पर जल सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए दीर्घकालिक जल दृष्टिकोण को संस्थागत और क्रियाशील तरीकों में बदलने के देश के अनुभव को साझा किया।
यह सत्र ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल ज़ुसामेनार्बेट और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान ने आयोजित किया था।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने वर्ल्ड वॉटर वीक 2026 में समुदाय के नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास, प्रौद्योगिकी से चलने वाले शासन और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन के ज़रिए जल सुरक्षा को मज़बूत करने के भारत के वादे को दोहराया। ग्लोबल फोरम ने जलवायु अनुकूलन और सबको साथ लेकर चलने वाले जल प्रबंधन को आगे बढ़ाने में देश के अनुभव साझा करने और अंतरराष्ट्रीय बेहतर विधियों से सीखने के लिए एक ज़रूरी मंच प्रदान किया।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित वर्ल्ड वॉटर वीक, पानी पर बातचीत, सहयोग और नवाचार के लिए दुनिया के सबसे बड़े मंचों में से एक है। यह सालाना कार्यक्रम दुनिया भर की सरकारों, विकास सहयोगियों, शोध संस्थानों और पेशेवरों को पानी की उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और ज्ञान, अनुभव और समाधान साझा करने के लिए एक साथ लाता है।
देश के नज़रिए पर रोशनी डालते हुए, सुश्री भाजीभाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, जल सुरक्षा भारत की विकास यात्रा का एक अहम हिस्सा बनकर उभरी है। भारत का वॉटर विज़न एट 2047, विकसित भारत एट2047 के बड़े दृष्टिकोण के साथ मिलकर, सभी नागरिकों के लिए समन्वित योजना, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के ज़रिए मज़बूत, सबको साथ लेकर चलने वाली और निरंतर जल सुरक्षा सुनिश्चत करना चाहता है। पानी को तेज़ी से गांवों में खुशहाली, जन स्वास्थ्य, महिलाओं के सशक्तीकरण्, जलवायु अनुकूलनता और सतत विकास की नींव के तौर पर देखा जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार देश के जल सुरक्षा ढांचे को जल जीवन मिशन और नेशनल इनिशिएटिव ऑन वॉटर सिक्योरिटी जैसे फ्लैगशिप पहल के संयोजन के ज़रिए आगे बढ़ाया जा रहा है। जहां जल जीवन मिशन गांव के इलाकों में साफ पीने के पानी तक पहुंच को मजबूत कर रहा है, वहीं वैज्ञानिक और डेटा-ड्रिवन प्लानिंग के ज़रिए पानी बचाने, भूजल रिचार्ज, जल प्रबंधन और जल सुरक्षा से जुड़ी दूसरी सम्पत्तियों में निवेश को मज़बूत किया जा रहा है।
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