नयी दिल्ली , अक्टूबर 28 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने बुधवार को को फिलीपींस के सेबू में आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक (एडीएमएम-प्लस) से इतर मुलाकात की।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक जहाजों के डिजाइन और निर्माण में संभावित संयुक्त विकास तथा वायुसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस साल के अंत में टोक्यो में विदेश और रक्षा मंत्रियों की चौथी टू प्लस टू बैठक और रक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की दिशा में बातचीत तेज करने पर भी सहमति जताई।
दोनों मंत्रियों ने अगस्त में हुई पिछली मुलाकात के बाद द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में प्रगति का स्वागत किया। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक और परिचालन जरूरतों के अनुरूप सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने की क्षमता बढ़ाना और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता तथा भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर नौसैनिक जहाजों के डिजाइन और निर्माण में संयुक्त विकास की संभावनाएं तलाशना शामिल है। इस दिशा में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख की जापान यात्रा को भी अहम माना गया।
दोनों देशों ने वायुसेनाओं के बीच सहयोग मजबूत करने की दिशा में हुई प्रगति का भी स्वागत किया। भारत-जापान वायुसेना अभ्यास 'वीर गार्जियन 26' के दौरान पहली बार जापान वायु सेना के लड़ाकू विमान भारत आए थे। इस अभ्यास के साथ जापान वायु सेना के प्रमुख की भारत यात्रा भी हुई थी।
रक्षा उद्योग के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में भारत-जापान रक्षा उद्योग मंच के सफल आयोजन का उल्लेख किया। इस मंच में दोनों देशों की करीब 40 कंपनियों ने हिस्सा लिया।
दोनों मंत्रियों ने इस साल के अंत में टोक्यो में भारत-जापान विदेश और रक्षा मंत्रियों की चौथी टू प्लस टू बैठक और रक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित करने के लिए बातचीत तेज करने पर सहमति जतायी।
बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में श्री सिंह ने कहा कि बातचीत में भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के नये रास्तों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत और जापान की साझा प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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