बीजिंग , अगस्त 26 -- भारत और चीन ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जतायी है। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाये रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
यह सहमति भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 24 एवं 25 अगस्त को बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता के दौरान बनी। दोनों नेताओं ने बैठक की सह-अध्यक्षता की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा मुद्दे पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया। बातचीत रचनात्मक और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रही।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने अपने व्यापक और दीर्घकालिक हितों के संदर्भ में सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जतायी। श्री डोभाल ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाये रखने को द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, श्री वांग और श्री डोभाल ने सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक, गहन, मैत्रीपूर्ण और स्पष्ट चर्चा की। दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण वार्ता को आगे बढ़ाने, सीमा प्रबंधन मजबूत करने, संबंधित तंत्रों में सुधार करने और सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया।
चीन के अनुसार, दोनों देशों ने 2005 में तय राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करने तथा आपसी सम्मान और समझ की भावना के साथ विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता व्यवस्था का इस्तेमाल कर सीमा विवाद का निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य व्यापक समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहरायी।
दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधियों की 26वें दौर की वार्ता 2027 में भारत में आयोजित करने पर भी सहमति जतायी।
श्री वांग ने कहा कि चीन और भारत को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, संवाद मजबूत करना चाहिये और मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहिये। उन्होंने दोनों देशों को महत्वपूर्ण पड़ोसी और बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं बताया और कहा कि स्थिर और स्वस्थ द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के लोगों के मूल हित में हैं।
चीन के अनुसार, श्री वांग ने सीमा मुद्दे को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों में उसका उचित स्थान देने तथा यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सीमा मामलों में संवाद, शांति, विचार-विमर्श और सहयोग मुख्यधारा बने रहें।
चीनी पक्ष के अनुसार, श्री डोभाल ने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं तथा स्थिर, पूर्वानुमेय और भविष्य की ओर देखने वाले संबंध दोनों देशों के साझा हित में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंध एशिया और व्यापक विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय पक्ष ने कहा कि अक्टूबर 2024 में कज़ान और अगस्त 2025 में तियानजिन में श्री मोदी और श्री शी की बैठकों में बनी सहमतियों को लागू करने में भी प्रगति हुई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन निर्धारित व्यापारिक दर्रों के जरिए सीमा व्यापार सहित लोगों के बीच तथा सीमा पार संपर्क धीरे-धीरे बहाल हुए हैं।
यह वार्ता 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने के जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच हुई है। डोभाल ने बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंगसे भी मुलाकात की।
यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति श्री शी के प्रस्तावित भारत दौरे की उम्मीद है।
भारत-चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद है। सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों की व्यवस्था 2003 में स्थापित की गयी थी। विशेष प्रतिनिधियों की चौबीसवीं दौर की वार्ता पिछले वर्ष अगस्त में बीजिंग में हुई थी।
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