हैदराबाद , जून 09 -- भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष सी. रंगराजन ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने एवं वैश्विक व्यवधानों से निपटने के लिए देश में सतत ऊर्जा परिवर्तन में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
हैदराबाद स्थित आईसीएफएआई स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और मुंबई स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 18वें वार्षिक डॉक्टरेट थीसिस सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए, पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत के सामने आने वाली कई आर्थिक चुनौतियां घरेलू कमजोरियों के बजाय बाहरी झटकों से उत्पन्न होती हैं।
हाइब्रिड मोड में चार और पांच जून को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों सहित प्रमुख संस्थानों के लगभग 200 डॉक्टरेट शोधार्थी, शिक्षाविद और शोधकर्ता एक मंच पर आए।
आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन के चांसलर श्री रंगराजन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान और पश्चिम एशिया में तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है, ऊर्जा एवं खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता उत्पन्न की है। उन्होंने कहा कि रुपये के हालिया अवमूल्यन के बावजूद भी भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक तनावों में कमी होने से मुद्रा स्थिरता को समर्थन मिलेगा।
उन्होंने बाह्य आर्थिक झटकों से निपटने के लिए तीन-सूत्री रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की। अल्पावधि में, उन्होंने राजनयिक जुड़ाव एवं आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण की वकालत की। मध्यम अवधि में, उन्होंने ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक सुरक्षा उपायों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। दीर्घकालिक अवधि में उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुशल और चयनात्मक आयात प्रतिस्थापन के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी घरेलू क्षमताओं के निर्माण का आह्वान किया।
ऊर्जा सुरक्षा के महत्व का उल्लेख करते हुए श्री रंगराजन ने नीति निर्माताओं से आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक व्यवधानों के खिलाफ लचीलापन बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधानों को तेजी से अपनाने का आग्रह किया।
आईजीआईडीआर के निदेशक (कुलपति) बसंत कुमार प्रधान ने अपने संबोधन में वैश्विक जलवायु वित्त परिदृश्य पर बात की और जलवायु वित्त, हरित वित्त, संक्रमणकालीन वित्त और सतत वित्त की अवधारणाओं को समझाया। उन्होंने जलवायु संबंधी निवेशों में निजी पूंजी और परियोजना-आधारित वित्तपोषण की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उद्घाटन सत्र में आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन की कुलपति तम्मा कोटि रेड्डी उपस्थित थीं जबकि सी.एस. शैलजान ने अनुसंधान उत्कृष्टता और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने में सम्मेलन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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