बेंगलुरु , अगस्त 02 -- टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने अपने उद्यम के लिए एक ऐसा दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया है, जिसने एक शताब्दी से अधिक समय से टाटा ग्रुप का मार्गदर्शन करने का काम किया है वो है - "वो करो, भारत को जिसकी जरूरत हो।"श्री टाटा ने ट्रस्ट्स के संस्थापकों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी धन कमाने को अपना मकसद नहीं माना। उन्होंने हमेशा यही संदेश दिया कि भारत के लिए अच्छा करो और कंपनियां भारत की सेवा करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए हैं।

श्री टाटा ने पारंपरिक परोपकार से स्थायी राष्ट्रीय संस्था बनाने की ओर एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए कहा कि ट्रस्ट्स गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ाने, उच्च शिक्षा को मजबूत करने और उसके नतीजों के जरिए परोपकार को अधिक जवाबदेह बनाने पर फोकस करेंगे।

श्री टाटा ने आईआईएमब्यूज आईआईआईएमबीएए लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में 'फ्रॉम एंटरप्राइज टू इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग: द टाटा फिलॉसफी इन ए चेंजिंग इंडिया' शीर्षक वाली एक बातचीत में कहा कि टाटा ग्रुप के संस्थापकों ने कभी भी धन पैदा करने को अपना मकसद नहीं माना। उन्होंने कहा, "संस्थापकों ने कंपनियों में अपने शेयर ट्रस्ट्स को एक संदेश के साथ दिए थे कि भारत के लिए अच्छा करो। उन्होंने कभी नहीं कहा कि सबसे बड़ी कंपनी बनो। कंपनियां भारत की सेवा करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए हैं।" श्री नोएल टाटा ने जमशेदजी टाटा, सर दोराब टाटा, जेआरडी टाटा और रतन टाटा की विरासत को याद करते हुए कहा कि ट्रस्ट्स ऐसे संस्थान बनाने की परंपरा को फिर से शुरू करेंगे जो अपने संस्थापकों के जाने के बाद भी देश की सेवा करते रहेंगे।

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