नयी दिल्ली , मई 06 -- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि भारत अगले महीने यहां अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण इस सम्मेलन में 95 देश के 400 से अधिक प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
श्री यादव ने बुधवार को यहां शिखर सम्मेलन के लोगो तथा आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह सम्मेलन एक तथा दो जून को आयोजित किया जाएगा जिसमें विभिन्न देशों के मिशन प्रमुखों और मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री ने उन देशों से विशेष अपील की है जिनके यहां बड़ी बिल्ली प्रजातियां पाई जाती हैं लेकिन वे अभी तक आईबीसीए से नहीं जुड़े हैं इसलिए उन्हें जल्द से जल्द इन प्रजातियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करेगा और बड़ी बिल्लियों के संरक्षण में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई गति देगा।
श्री यादव ने बताया कि ''बड़ी बिल्लियों को बचाएं, मानवता को बचाएं, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाएं'' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया भर से 400 से अधिक संरक्षण विशेषज्ञ, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और कॉर्पोरेट प्रतिनिधि भाग लेंगे। साथ ही सदस्य और पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की भी भागीदारी की संभावना है।
उन्होंने कहा कि भारत ने बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता जैसे वन्यजीवों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और यह दिखाया है कि विकास और संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। इसी अनुभव और वैश्विक जिम्मेदारी की भावना के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2023 में आईबीसीए की स्थापना की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मंच को सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों शेर, बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग का अनूठा उदाहरण बताया और कहा कि यह शिखर सम्मेलन वैश्विक संरक्षण कूटनीति में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
उन्होंने जानकारी दी कि सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम ''दिल्ली घोषणा'' के रूप में सामने आएगा, जो बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैश्विक प्राथमिकताओं, सीमा-पार सहयोग और साझा रणनीतियों को स्पष्ट करेगा।
शिखर सम्मेलन के दौरान 01-02 जून को तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे, जिनमें 95 देशों के विशेषज्ञ और अधिकारी भाग लेंगे। इसके अलावा एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें जनजातीय कला, फोटोग्राफी, फिल्म, वर्चुअल रियलिटी और भारत की संरक्षण उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि लॉन्च की गई वेबसाइट शिखर सम्मेलन की आधिकारिक डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी और वैश्विक स्तर पर संवाद, जानकारी साझा करने और जनभागीदारी को बढ़ावा देगी। उन्होंने लोगों को भी प्रकृति के संतुलन, एकता और पारिस्थितिकी तंत्र की परस्पर जुड़ाव का प्रतीक बताया।
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