यरुशलम , फरवरी 26 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दो दिवसीय इजराइल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, कृषि, साइबर सुरक्षा, एआई तथा यूपीआई समेत कई क्षेत्रों में सहयोग के लिए करार किये और रिश्तों के विशेष रणनीतिक भागीदारी में बदलने के लिए घोषणाएं कीं।

इनमें पांच साल में 50,000 भारतीय कामगारों को इजराइल में कोटा देने, संयुक्त अनुसंधान में योगदान बढ़ाने और अकादमिक सहयोग फोरम के गठन की घोषणाएं भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री की यात्रा की समाप्ति पर जारी साझा घोषणा पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों ने 17 सहमति पत्रों/समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके अलावा 10 घोषणाएं भी की गयी हैं।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद को किसी भी स्वरूप और तरीके को अस्वीकार्य बताते हुए उसका मिलकर मुकाबला करने के प्रति दोनों देशों के संकल्प को दोहराया। भारत और इजराइल ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर और आई2यू2 (इंडिया-इजरायल-यूएई-यूएसए) पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने वार्ताकारों को मुक्त व्यापार समझौता वार्ता जल्द संपन्न करने के निर्देश दिये हैं और कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की संभावनाओं का पूरा उपयोग किया जाना चाहिये।

संयुक्त घोषणापत्र में भारत इजरायल के बीच पिछले साल चार नवंबर को रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए हुए करार स्वागत किया गया है। दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में भविष्य में सहयोग के लिए अपनी एक सोच और वृहद योजना प्रदान की है।

संयुक्त घोषणा पत्र के अनुसार, दोनों देशों ने खनिज अन्वेषण में अत्याधुनिक भूगर्भ और एआई आधारित प्रौद्योगिकी, डाटा के आदान-प्रदान, निवेश और सतत संसाधनों के विकास के लिए सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।

दोनों पक्षों के बीच कृषि के क्षेत्र में प्रीसीजन फार्मिंग, उपग्रह आधारित सिंचाई, आधुनिक मशीनरी, कीट प्रबंधन और फसल कटाई के बाद के समाधानों बढ़ावा देने के लिए भारत-इजराइल कृषि नवाचार केंद्र (आईआईएनसीए) की स्थापना के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और इजरायल के समकक्ष संस्थान माशाव के बीच एमओयू हुआ है।

भारत और इजराइल के लोगों के बीच धन के लेन-देन और एक-दूसरे के यहां भुगतान को आसान बनाने के लिए भारत के एनपीसीआई इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म और इजरायल के संबंधित संगठन मसाव ने एक एमओयू किया है। इससे भारत के यूपीआई के जरिये इजराइल में भी लेनदेन संभव हो जायेगा। पूर्वी एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के कई देशों में यूपीआई की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है।

वाणिज्य और सेवाओं के क्षेत्र में मानव संसाधन के परस्पर आदान-प्रदान के लिए भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है। रेस्त्रां क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र में कामगारों की आवाजाही के लिए भी अलग-अलग समझौते हुए हैं। इन कामगारों को रिटेल, सफाई, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, खाद्य प्रसंस्करण, आतिथ्य, रिसाइकिलिंग, कपड़ा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, लकड़ी और कागज, प्लास्टिक और रबर जैसे क्षेत्रों में काम मिलेगा। अगले पांच साल में भारतीय कामगारों के लिए इजराइल में 50 हजार तक कोटा देने की घोषणा की गयी है।

शिक्षा के क्षेत्र में बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय और यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के बीच फैकल्टी और छात्रों को एक-दूसरे के यहां भेजने के लिए एक एमओयू हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल कर पठन-पाठन को बेहतर बनाने के लिए भी एक एमओयू हुआ है। एआई को बढ़ावा देने और क्षमता विस्तार, एथिकल एआई को समर्थन और नागरिक क्षेत्रों में उनका इस्तेमाल पर भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं।

इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ कमर्शियल एर्बिट्रेशन और इंडिय काउंसिल ऑफ एर्बिट्रेशन ने ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रशिक्षण के जरिये मध्यस्थता में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता किया है।

दोनों देशों के बीच इस साल स्वास्थ्य क्षेत्र पर संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है और दोनों नेता स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार और एआई तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प के लिए दोनों देशों के संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं।

दोनों देशों ने वर्ष 2026 से 2029 तक सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक परिदृश्यों में बदलाव की समय रहते पहचान क्षेत्र में अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने और क्षमता विकास के लिए समझौते किये हैं।

भारत में एक संयुक्त साइबर उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं।

दोनों पक्षों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर मंत्री स्तरीय संयुक्त समिति के गठन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के नेतृत्व में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग की पहल, वित्तीय वार्ता, टेक-गेटवे (प्रौद्योगिकी का द्वार बनाने संबंधी) पहल, कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप, संयुक्त अनुसंधान में योगदान बढ़ाने, भारत-इजराइल अकादमिक सहयोग फोरम और भारत-इजराइल संसदीय मैत्री समूह के गठन की भी घोषणा की।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित