वाशिंगटन , अप्रैल 20 -- भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर सोमवार से वाशिंगटन में तीन दिनों की अहम बैठक शुरू हो रही है।

बुधवार 22 अप्रैल तक चलने वाली इस वार्ता का मकसद दोनों देशों के बीच कारोबार के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर करना है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट बना हुआ है।

अमेरिकी व्यापार नीति में हाल ही में हुए बदलावों के कारण यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आपातकालीन शक्तियों (1977 का कानून) के तहत लगाए गए आयात शुल्क को रद्द कर दिया था, जिसके बाद, ट्रम्प प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का एक समान शुल्क लागू कर दिया है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन कर रहे हैं। 12 सदस्यों वाली इस टीम में वाणिज्य, सीमा शुल्क और विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं, जो इन चर्चाओं के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।

अक्टूबर 2025 के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली आमने-सामने की बैठक है। सात फरवरी 2026 में जारी किए गए मसौदे को अमेरिकी टैरिफ नीति में आए बदलावों के बाद अब फिर से नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है।

फरवरी के मसौदे में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर लगभग 18 प्रतिशत करने और कुछ विशेष क्षेत्रों से आयात शुल्क को हटाने का प्रस्ताव दिया था।

बदले में, भारत ने अमेरिकी औद्योगिक सामानों और चुनिंदा कृषि उत्पादों जैसे सोयाबीन तेल, सूखे मेवे, शराब और अनाज पर शुल्क कम करने का संकेत दिया था। साथ ही, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान के पुर्जों और तकनीक सहित 500 अरब डॉलर के सामान आयात करने की योजना बनाई है।

अमेरिका की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता के बाद श्री ट्रम्प भारत पर लगे अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने पर सहमत हुए हैं।

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