नयी दिल्ली , मई 28 -- भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के नये रास्ते तलाशने और इस सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए बेहद उत्सुक हैं।

श्री अलीपोव ने गुरूवार को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुये कहा कि रूस ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के विस्तार के लिये एक नयी प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। वह यहां द्वितीय इंडो-रशियन एजुकेशन समिट 2026 (आईआरईएस 2026) का उद्घाटन कर रहे थे।

राजदूत ने कहा कि रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुयी है। रूसी विश्वविद्यालय बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं और उन अवसरों को तलाश रहे हैं जो यहां, इस देश में खुले हैं। यह एक बहुत ही सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि हमारे दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और संबंधों की एक लंबी परंपरा और इतिहास रहा है। पिछले कुछ दशकों में, लाखों भारतीय छात्रों ने रूस में पढ़ाई की है, वहां से योग्यता हासिल की है और फिर भारत के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

एजुकेशन समिट 2026 (आईआरईएस 2026) में भारत और रूसी संघ के प्रतिष्ठित गणमान्य अतिथि, वरिष्ठ प्रतिनिधि, नीति निर्माता, शिक्षाविद् एवं संस्थागत प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुये।

रूस एजुकेशन ने भारत में रॉसोट्रुडनिचेस्टवो के माध्यम से रूसी संघ के दूतावास तथा नई दिल्ली स्थित रशियन हाउस के सहयोग से इस सम्मेलन आयोजित किया, जिसके उद्घाटन दिवस पर शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, शैक्षणिक आदान-प्रदान और संस्थागत साझेदारी के क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गयी। इस तरह दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग के मामले में रूस और भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।

श्री अलीपोव के साथ रूस के कई अन्य प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भी एजुकेशन समिट 2026 में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी, जिनमें भारत में रॉसोट्रुडनिचेस्टवो के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिज़ोवा; रूसी संघ की स्वास्थ्य उपमंत्री डॉ. तात्याना सेम्योनोवा; रॉसोट्रुडनिचेस्टवो के उप प्रमुख डॉ. पावेल शेवत्सोव; तथा रूसी संघ के कृषि मंत्रालय के शिक्षा विभाग की निदेशक सुश्री यूलिया कोंडिकोवा शामिल थीं। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारत के कई प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिनमें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ; एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक; हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा; एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ की सचिव डॉ. पंकज मित्तल; एमिटी एजुकेशन ग्रुप के कुलपति प्रो. गुरिंदर सिंह; शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रो. पी.के. गुप्ता; संतोष डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. वी.एन. महालक्ष्मी; इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. महेश वर्मा; भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से डॉ. वंदना चौधरी; तथा रूस एजुकेशन के उपाध्यक्ष एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) शामिल थे।

सम्मेलन के पहले दिन चार प्रमुख पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनमें चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी, कृषि, खाद्य सुरक्षा, खेल, युवा सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन चर्चाओं ने छात्र विनिमय, शिक्षकों का एक-दूसरे के यहां जाकर शिक्षण कार्य करना, संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक साझेदारी और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

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