नयी दिल्ली , अक्टूबर 03 -- नई दिल्ली के वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राघव अग्रवाल ने इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) के स्पोर्ट्स मेडिसिन प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्हें 2026 में लुसाने में आईओसी डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स मेडिसिन से सम्मानित किया गया। दो दशक से ज्यादा के अनुभव वाले डॉ. अग्रवाल मस्कुलोस्केलेटल और स्पोर्ट्स अल्ट्रासाउंड, अल्ट्रासाउंड-गाइडेड प्रक्रियाओं और मांसपेशियों, जोड़ों, टेंडन और नसों से जुड़ी समस्याओं की जांच में विशेषज्ञता रखते हैं।
उनकी विशेषज्ञता में स्पोर्ट्स इंजरी, गठिया, सूजन से जुड़ी समस्याएं, नसों से जुड़ी बीमारियां और मायोफेशियल पेन जैसी स्थितियां शामिल हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन की ट्रेनिंग के साथ एडवांस्ड स्पोर्ट्स इमेजिंग की उनकी विशेषज्ञता खिलाड़ियों की चोटों की पहचान और उनके इलाज की योजना बनाने में मदद करती है। इसमें चोट की सही पहचान, इलाज का विकल्प तय करना, रिकवरी की निगरानी और खिलाड़ी के सुरक्षित रूप से खेल में लौटने का सही समय तय करना शामिल है।
प्रतिस्पर्धी और हाई-परफॉर्मेंस स्तर पर खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह विशेषज्ञता चोटों की जल्दी और सटीक पहचान तथा रिकवरी के दौरान बेहतर निगरानी में मदद कर सकती है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, स्पोर्ट्स मेडिसिन में सिर्फ चोट की पहचान करना ही नहीं, बल्कि खिलाड़ी की जरूरत और उसके खेल में वापसी को ध्यान में रखते हुए सही मेडिकल फैसले लेना भी जरूरी है।
उत्तर भारत में डॉ. अग्रवाल की विशेषज्ञता को एक अलग पहचान इसलिए भी मिलती है क्योंकि वह इस क्षेत्र के एकमात्र मस्कुलोस्केलेटल रेडियोलॉजिस्ट हैं, जिनके पास आईओसी स्पोर्ट्स मेडिसिन डिप्लोमा है। इससे खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर स्पोर्ट्स मेडिसिन से जुड़ी इमेजिंग विशेषज्ञता उपलब्ध हो सकती है।
आईओसी का यह डिप्लोमा दो साल का पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम है, जिसमें करीब 800 घंटे की पढ़ाई, शिक्षण, मूल्यांकन और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल होती है। इसमें स्पोर्ट्स इंजरी, खिलाड़ियों के स्वास्थ्य का आकलन, इलाज, रिहैबिलिटेशन और खेल में सुरक्षित वापसी से जुड़े विषय शामिल हैं।
अपनी उपलब्धि पर डॉ. राघव अग्रवाल ने कहा, "स्पोर्ट्स मेडिसिन में सही डायग्नोसिस, समय पर ट्रीटमेंट और खिलाड़ी की जरूरतों को समझना बहुत जरूरी है। आईओसी डिप्लोमा पूरा करने से स्पोर्ट्स इंजरी और रिहैबिलिटेशन को लेकर मेरा ज्ञान और मजबूत हुआ है। मैं इस सीख का इस्तेमाल बेहतर मरीजों की देखभाल, खासकर खिलाड़ियों के इलाज में करना चाहता हूं। साथ ही, भारत में स्पोर्ट्स इमेजिंग और मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड को आगे बढ़ाने में भी योगदान देना चाहता हूं।"डॉ. अग्रवाल अपनी क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग से भी जुड़े हैं। नई दिल्ली स्थित डॉ. एम. एल. अग्रवाल इमेजिंग सेंटर में वह चार से छह महीने के फेलोशिप प्रोग्राम का नेतृत्व करते हैं। इस प्रोग्राम में डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग, इमेजिंग के नतीजों को समझने, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई की तुलना करने और इमेज-गाइडेड प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी जाती है।
रेडियोलॉजी के क्षेत्र में भी डॉ. अग्रवाल कई जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह 2025-2026 में आईआरआईए के दिल्ली स्टेट चैप्टर के अध्यक्ष रहे। वह इंडियन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग की गवर्निंग बॉडी में भी रह चुके हैं और मस्कुलोस्केलेटल सोसाइटी के साथ काम कर चुके हैं। 2026 में उन्हें आईआरआईए की प्रिवेंटिव रेडियोलॉजी कमेटी का नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी डॉ. अग्रवाल रेडियोलॉजी से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। 2026 में उन्होंने सिंगापुर में आयोजित 24वें एशियन ओशिनियन कांग्रेस ऑफ रेडियोलॉजी में शीयर-वेव इलास्टोग्राफी और स्पोर्ट्स इंजरी में अल्ट्रासाउंड जैसे विषयों पर बात की। उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित एशियन मस्कुलोस्केलेटल सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन में कोर्स डायरेक्टर, मॉडरेटर और फैकल्टी के रूप में भी हिस्सा लिया।
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