उदयपुर , मई 22 -- राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा है कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला है।
प्रो. सारंगदेवोत ने शुक्रवार को यहां राजस्थान विद्यापीठ के संघटक माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के शिक्षा संकाय की ओर से आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा 'प्राचीन से आधुनिक शिक्षा तक' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत सदैव ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म की भूमि रहा है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मबोध, अनुशासन, प्रकृति से जुड़ाव और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया जाता था। गुरुकुल व्यवस्था में विद्यार्थी को जीवनोपयोगी शिक्षा दी जाती थी, जिससे वह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सक्षम बन सके।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय वैदिक शिक्षा प्रणाली "लाइफ लॉन्ग लर्निंग" अर्थात जीवन पर्यन्त सीखने की अवधारणा पर आधारित थी। वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, भाषा विज्ञान और दर्शन जैसे विषय अनुभव आधारित पद्धति से पढ़ाए जाते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व जिन अवधारणाओं को आधुनिक शोध का परिणाम मान रहा है, उनके मूल तत्व भारतीय ज्ञान परंपरा में हजारों वर्षों पूर्व विद्यमान थे।
उन्होंने भारतीय तर्कशास्त्र, न्याय दर्शन और पाणिनि के व्याकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग के विकास में भी प्रेरणास्रोत बन रही है। संस्कृत भाषा की वैज्ञानिक संरचना और भारतीय गणितीय पद्धति अब तकनीकी शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का विषय बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति- 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, योग, भारतीय दर्शन और मूल्यपरक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इससे शिक्षा अधिक व्यवहारिक, रोजगारपरक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनेगी।
प्रारंभ में निदेशक प्रो. सुनिता मुर्डिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि सेमीनार में राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से 150 से अधिक प्रतिभागी शिरकत कर रहे हैं। सेमीनार में भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल शिक्षा, एआई आधारित शिक्षण प्रणाली और मूल्य आधारित शिक्षा जैसे विषयों पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
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