नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने देश के वस्त्र क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक उत्साहजनक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए गुरुवार को कहा कि भारतीय कारीगरों, डिज़ाइनरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पास वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय ब्रांड स्थापित करने की अपार संभावनाएँ हैं।
उन्होंने कहा कि देश के कारीगर, डिजाइनर और छोटे उद्यमी भारत की उत्कृष्ट हस्तशिल्प परंपरा, समृद्ध वस्त्र विरासत और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी कर सकते हैं।
यहां भारत मंडपम में कपड़ा क्षेत्र की वैश्विक प्रदर्शनी और संम्मेलन भारत टेक्स-2026 के तीसने दिन गुरुवार को "भारतीय ब्रांड, वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ: सीमाओं से परे खुदरा विकास को नई परिभाषा" विषय पर एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा किवैश्विक बाजारों में भारतीय ब्रांडों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए केवल उत्पादन की मात्रा ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता, स्वस्थ विकास (सस्टेनेबिलिटी) और ट्रेसेबिलिटी (उत्पाद की स्रोत से उपभोक्ता तक की पारदर्शी जानकारी) भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की समृद्ध हस्तशिल्प एवं वस्त्र परंपरा को विश्व के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
कपड़ा मंत्री ने कहा, "कारीगर भारत की पूंजी हैं", और दोहराया कि भारत के कारीगर एवं बुनकर देश के वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भारत टेक्स 2026 जैसे आयोजन कारीगरों और बुनकरों को अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन करने, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने तथा सतत आजीविका के नए अवसर प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही, ऐसे आयोजन भारत की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस सत्र में डिज़ाइनरों, उद्यमियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों और विनिर्माताओं ने भाग लिया। इस दौरान विचार-विमर्श किया कि किस प्रकार भारतीय वस्त्र एवं लाइफस्टाइल ब्रांड अपनी समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान मजबूत कर सकते हैं और बड़े स्तर पर विस्तार कर सकते हैं। सत्र में 20 से अधिक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें भारतीय ब्रांडों के प्रतिनिधि, लक्ज़री डिज़ाइनर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के विशेषज्ञ , वेलस्पन वर्ल्ड , नेयट्ट होम्स , पश्मीना डॉट कॉम , एक्सपोबाज़ार और ट्राइडेंट) जैसे प्रमुख ब्रांडों के उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधि शामिल थे।
वक्ताओं ने भारतीय ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने, खुदरा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ बनाने तथा नवाचार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उनका कहना था कि भारत का फैशन एवं परिधान उद्योग एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह क्षेत्र अपनी पारंपरिक विनिर्माण क्षमता से आगे बढ़ते हुए अब डिज़ाइन नवाचार, उच्च गुणवत्ता और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है।
कपड़ा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के वस्त्र एवं परिधान निर्यात का मूल्य लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये रहा है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 9 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही भारत द्वारा किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार प्रमुख वैश्विक बाजारों तक पहुँच के नए अवसर उपलब्ध करा रहा है।
चर्चा में इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस सत्र में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि भारतीय ब्रांड अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को किस प्रकार दीर्घकालिक वैश्विक विकास में परिवर्तित कर सकते हैं। इसके लिए मजबूत ब्रांड पहचान का निर्माण, ओम्नी-चैनल (बहु-माध्यमीय) विपणन एवं बिक्री क्षमताओं का विस्तार तथा वैश्विक उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष चर्चा की गई।
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