नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- भारत और अजरबैजान ने तेल एवं ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई है।

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, ऊर्जा और परिवहन संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतें एक-दूसरे के अनुरूप हैं और व्यापार व निवेश बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।

श्री जयशंकर ने कहा कि उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के बीच पिछले महीने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद हो रही है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और श्री मोदी की ओर से अजरबैजान के राष्ट्रपति को शुभकामनाएं भी दीं। उनके मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई और सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर विचार हुआ।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियां कई वर्षों से अजरबैजान में काम कर रही हैं। खास तौर पर तेल और ऊर्जा क्षेत्र में भारत का निवेश महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाशने पर सहमति जताई। व्यापार और निवेश को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी।

दोनों देशों ने परिवहन संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके संबंध में आपसी समन्वय और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने हवाई संपर्क को भी अहम बताया और कहा कि संबंधों को और मजबूत करने के लिए इसे बढ़ाने के तरीकों पर विचार करना होगा।

श्री जयशंकर ने अजरबैजान में पढ़ रहे भारतीय विद्यार्थियों की देखभाल के लिए वहां की सरकार का आभार जताया। उन्होंने इस साल ईरान में संघर्ष के दौरान वहां से भारतीय नागरिकों, खासकर विद्यार्थियों को निकालने में अजरबैजान की सहायता के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने अजरबैजान से विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों की भारत की तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (आईटीईसी) में भागीदारी फिर शुरू करने और बढ़ाने का आग्रह किया।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के दौरान श्री जयशंकर ने कहा कि भारत विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने का समर्थन करता है। उन्होंने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच पिछले साल अगस्त में हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।

दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्षों का असर खास तौर पर विकासशील देशों पर पड़ रहा है, जिन्हें खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता को दोनों देशों के साझा विरोधी बताया।

श्री जयशंकर ने कहा कि अजरबैजान के विदेश मंत्री बैरामोव को भारत आने का निमंत्रण दिया गया है। दोनों देशों ने व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई।

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