चंडीगढ़ , अगस्त 9 -- पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वह भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन के लिए इतने बेचैन क्यों हैं कि विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी अपना रुख बदलना पड़ा।

श्री वड़िंग ने रविवार को श्री बादल को याद दिलाया कि करीब तीन महीने पहले अप्रैल में अकाली दल ने परिसीमन विधेयक का जोरदार विरोध करते हुए इसे पंजाब के हितों के खिलाफ बताया था। उन्होंने सवाल किया, "इन तीन महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि अब उसी विधेयक में आपको अच्छाई नजर आने लगी, जिसे आप पहले पंजाब के हितों के खिलाफ बता रहे थे?"श्री वड़िंग ने तंज कसते हुए कहा कि श्री बादल ने बहुत कम समय में अपना रुख बदलकर "राजा से भी ज्यादा वफादार" बनने की कोशिश शुरू कर दी है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसके पीछे कारण स्पष्ट हैं। उनके अनुसार, अपने राजनीतिक अस्तित्व को लेकर चिंतित श्री बादल 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को खुश करने और उसके साथ चुनावी गठबंधन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

श्री वड़िंग ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले जब अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था, तब श्री बादल ने दावा किया था कि वह पंजाब के हितों से समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, "अब जब आपको अपने राजनीतिक अस्तित्व की चिंता है, तो आपने पंजाब के उन्हीं हितों को भुला दिया है, जिनके लिए 2024 में आपने स्टैंड लेने का दावा किया था।" उन्होंने आरोप लगाया कि सुखबीर बादल का राजनीतिक अवसरवाद एक बार फिर उजागर हो गया है।

श्री वड़िंग ने कहा कि अगर अकाली दल और भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक साथ भी आ जाते हैं, तब भी उन्हें जीत की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग न तो बेअदबी की घटनाओं को भूले हैं और न ही किसानों पर हुए कथित अत्याचारों को। उन्होंने कहा कि दोनों दलों का दोबारा एक साथ आना उनकी चुनावी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं करेगा, बल्कि इससे उनका राजनीतिक अवसरवाद ही जनता के सामने उजागर होगा।

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