नयी दिल्ली , सितंबर 09 -- कांग्रेस ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संरक्षण में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए हजारों करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा कर सीधी कर दाताओं पर कुठाराघात हुआ है इसलिए इस पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) हैं और इनके जरिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये का चंदा दिखाकर आयकर में छूट का लाभ लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दो से 15 प्रतिशत तक कमीशन काटकर शेष राशि संबंधित करोड़पतियों को वापस पहुंचाई गई।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में इस संबंध में रिपोर्ट सामने आने के बावजूद मोदी सरकार ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। आयकर अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े में शामिल कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की लेकिन 'ऊपर' से कार्रवाई के आदेश नहीं दिए गए।

श्री गोहिल ने कहा कि आयकर कानून के तहत गलत जानकारी देने पर 200 प्रतिशत तक कर लगाने और गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान है। इसी प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

प्रवक्ता ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के चंदे और खर्च की जांच कर इसकी जानकारी आयकर विभाग को देना तथा आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करना उसकी जिम्मेदारी है लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। उन्होंने आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसी प्रक्रिया के कारण आयोग सरकार के इशारे पर काम करता है उन्होंने कहा कि फर्जी राजनीतिक दलों के कर्ताधर्ताओं, संबंधित कंपनियों और फर्जीवाड़े में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए और बोगस दानदाताओं पर 200 प्रतिशत की कानूनी जुर्माना लगाए जाने चाहिए। उन्होंने इसे गंभीर अपराध बताया और कहा कि इस पूरे मामले की जेपीसी से जांच कराई जाए।

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