अलवर , सितम्बर 17 -- राजस्थान में निकाय चुनावों के बाद नगर निकायों, बोर्ड और निगमों के गठन को लेकर चल रही सियासी जोड़-तोड़ के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह सत्ता और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करके पार्षदों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है।

श्री जूली ने गुरुवार को यहां कहा कि पुलिस और प्रशासन के जरिए कथित तौर पर पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और खरीद फरोख्त का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि निकाय चुनावों में राज्य की जनता ने कांग्रेस के पक्ष में अपना समर्थन जताया है। चुनाव के दौरान मतदाताओं ने जिस तरह कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया, उसके बाद अब भाजपा सरकार निकायों में बोर्ड बनाने के लिए सत्ता और प्रशासन का सहारा ले रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में पुलिस के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने गृह जिले अलवर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अलवर सहित राजस्थान के कई स्थानों पर पुलिस पार्षदों को जबरन पकड़ने या प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

श्री जूली ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक जोड़-तोड़ के लिए नहीं होना चाहिए। इससे राज्य में कई जगह पुलिस के साथ टकराव की स्थिति भी सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को नसीहत देते हुए कहा कि राजस्थान अपनी शांति, भाईचारे लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। सत्ता के बल पर तानाशाही और दबाव की राजनीति करके राजस्थान के माहौल को खराब नहीं किया जाना चाहिए।

विपक्ष के नेता ने कहा कि राजस्थान को ऐसा राज्य नहीं बनाया जाना चाहिए जहां सत्ता हासिल करने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने में हो। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने और निर्वाचित पार्षदों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने देने की बात कही।

श्री जूली ने कहा कि पुलिस और प्रशासन के दम पर जोड़-तोड़ करके भाजपा किसी निकाय में अपना बोर्ड बनाने में सफल हो सकती है, लेकिन इससे जनता का दिल नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में जनता ने अपना जनादेश दिया है और निर्वाचित पार्षदों पर किसी तरह का दबाव लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।

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