बागलाकोट/बेंगलुरु , अगस्त 23 -- कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी बेंगलुरु टनल रोड परियोजना पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोपों के बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

पूर्व मंत्री और भाजपा नेता बी. श्रीरामुलु ने राज्य में वित्तीय संकट और सूखे की स्थिति के बीच इस अत्यधिक खर्चीली परियोजना को शुरू करने की जल्दबाजी पर सवाल उठाए हैं।

बागलाकोट में पत्रकारों से बात करते हुए श्रीरामुलु ने आरोप लगाया कि इस परियोजना को जनहित में नहीं, बल्कि केवल कमीशन हासिल करने की मंशा से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब राज्य सरकार के पास वित्तीय संसाधन नहीं हैं, सरकार टनल परियोजना क्यों शुरू कर रही है? क्या यह 30 से 40 प्रतिशत कमीशन पाने के लिए किया जा रहा है?"उन्होंने कहा कि सरकार को भारी भरकम बजट वाले टनल प्रोजेक्ट में संसाधन झोंकने के बजाय सबसे पहले गड्ढों से भरी सड़कों की मरम्मत करानी चाहिए, सूखा पीड़ित किसानों को राहत देनी चाहिए और राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को संभालना चाहिए।

श्रीरामुलु ने कहा, "जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है। थोड़ा रुकिए। राज्य में किसान संकट में हैं और सूखा पड़ा हुआ है। सरकार को तुरंत राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए और मंत्रियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए।"उन्होंने इस बात पर भी संदेह जताया कि प्रस्तावित टनल से ट्रैफिक की समस्या में कितना सुधार होगा और सुझाव दिया कि सरकार को पहले मौजूदा सड़क नेटवर्क को मजबूत करना चाहिए।

भाजपा नेता की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उद्योगपति गौतम अदानी के बीच मुख्यमंत्री आवास पर हुई मुलाकात के बाद आई है। यह 16.5 किलोमीटर लंबी बेंगलुरु टनल रोड परियोजना को लेकर हुयी मुलाकात काफी चर्चा में है।

रिपोर्टों के अनुसार, अदानी ग्रुप ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 22,267 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाई है। हालांकि, सबसे कम बोली और सरकार की अनुमानित लागत के बीच के बड़े अंतर ने परियोजना के वित्तीय ढांचे पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गैप फंड को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल अपनाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे में श्री शिवकुमार और श्री अदानी की मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सरकार ने इस बैठक के ब्योरे का खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि चर्चा में टनल प्रोजेक्ट मुख्य मुद्दा था।

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