अहमदाबाद , अप्रैल 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 में एक शानदार और निर्णायक जीत दर्ज करते हुए पूरे राज्य में अपना राजनीतिक दबदबा और मजबूत कर लिया है।
उसे शहरी और ग्रामीण दोनों चुनावों में जबरदस्त कामयाबी हासिल हुई है। पार्टी ने राज्य के सभी 15 नगर निगमों में जीत का परचम लहराते हुए कुल 1,044 में से 856 सीटें अपने नाम कर ली है। जैसे ही परिणाम सामने आए तो गांधीनगर में भाजपा के राज्य मुख्यालय 'कमलम' में उत्सव का माहौल बनने लगा, जहां बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता इकट्ठा हुए।
भाजपा ने सभी प्रमुख नगर निगमों पर अपना दबदबा बनाया। उसने अहमदाबाद में 192 में से 158 सीटें, सूरत में 127 में से 115, राजकोट में 72 में से 65 और वडोदरा में 76 में से 69 सीटें जीतीं। उसने भावनगर, जामनगर, करमसद-आनंद और गांधीधाम जैसे शहरों में भी मजबूत जीत हासिल की और अंततः राज्य के सभी 15 नगर निगमों में जीत का परचम लहराते हुए कुल 1,044 सीटों में से 856 सीटें अपने नाम कीं।
छोटे निगमों में भी पार्टी का प्रदर्शन उतना ही शानदार रहा। पोरबंदर और मोरबी (प्रत्येक में 52/52 सीटें) में पूरी तरह से जीत हासिल की, नाडियाड और सुरेंद्रनगर (प्रत्येक में 51/52 सीटें) में लगभग सभी सीटें जीतीं, और नवसारी तथा मेहसाणा में भी जबरदस्त जीत दर्ज की। भाजपा ने वापी में 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) काफी पीछे रह गईं, जिससे शहरी गुजरात में विपक्षी दलों की सीमित मौजूदगी साफ तौर पर उजागर हुई।
भाजपा ने शहरी केंद्रों से परे ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है और जिला पंचायतों की 1,090 सीटों में से 568 सीटें और तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों में से 2,397 सीटें जीतीं हैं।
. पार्टी ने अकेले राजकोट जिले में ही 36 जिला पंचायत सीटों में से 34 सीटें हासिल कीं और 11 तालुका पंचायतों में से 10 पर अपना दबदबा बनाया। भाजपा के हालांकि इस दबदबे के कुछ उल्लेखनीय अपवाद भी देखने को मिले। राजकोट के जंगलेश्वर वार्ड में कांग्रेस सभी चार सीटें जीतने में कामयाब रही। इस परिणाम का श्रेय बड़े पैमाने पर मतदाताओं की उस नाराजगी को दिया जा रहा है, जो साल के प्रारंभ में चलाए गए एक बड़े तोड़-फोड़ अभियान के कारण पैदा हुई थी और जिसके चलते कई निवासियों को बेघर होना पड़ा था। भाजपा ने इसके बावजूद राजकोट नगर निगम पर अपना नियंत्रण आसानी से बनाए रखा है।
आप को शहरी इलाकों में खासकर सूरत में एक बड़ा झटका लगा। यहां पार्टी अपनी पिछले प्रदर्शन के मुकाबले केवल चार सीटों तक सिमट गई और उसके कई जाने-माने नेता चुनाव हार गए।
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