कोलकाता , जून 16 -- पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में उस समय एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) नेता अभिजीत दास ने डायमंड हार्बर क्षेत्र में 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की मिट्टी के बड़े पैमाने पर अवैध खनन और बिक्री का आरोप लगाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज करायी। श्री दास को 'बॉबी' के नाम से भी जाना जाता है।

कालीतला-आशुलिया थाने में सोमवार देर रात दर्ज करायी गयी इस शिकायत में डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी, उनके करीबी सहयोगी सुमित रॉय, बिष्णुपुर के विधायक दिलीप मंडल और 20 अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

श्री दास के अनुसार पिछले कई वर्षों के दौरान कईं चरणों में लगभग 163 बीघा भूमि की खुदाई की गयी और मिट्टी को कथित तौर पर अवैध रूप से बेचा गया। इससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि यह कथित गतिविधि 2017 में शुरू हुई थी और 2022 तथा 2023 के दौरान इसमें तेजी आयी।

शिकायत दर्ज कराने के बाद श्री दास ने आरोप लगाया कि अतीत में अधिकारियों से बार-बार शिकायतें की गयी थीं। फिर भी इस मामले की कोई प्रभावी जांच नहीं की गयी। उन्होंने कहा कि नवीनतम शिकायत की पुष्टि उपग्रह से लिये चित्रों से की जा सकती है। श्री दास के अनुसार, ये चित्र क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर की गयी खुदाई को दर्शाते हैं।

श्री दास ने दावा किया, "उपग्रह चित्र स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि मिट्टी कहां से निकाली गयी थी और खुदाई के कारण किस हद तक भूमि का क्षरण हुआ है। यह केवल वित्तीय अनियमितता का मुद्दा नहीं है बल्कि पर्यावरण की चिंता का भी विषय है। अनियंत्रित मिट्टी खनन से भूमि कटाव जैसी समस्या पैदा होती है और पारिस्थितिक असंतुलन हो सकता है।"भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मिट्टी के अवैध खनन और बिक्री के परिणामस्वरूप 300 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कहा कि भूमि संसाधनों के कथित ह्रास के कारण स्थानीय निवासियों को दीर्घकालिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। यह पहली बार नहीं है जब श्री दास ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ पुलिस से संपर्क किया है।

उन्होंने 2020 में चक्रवात अम्फान के बाद, एक शिकायत दर्ज करायी थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि आपदा प्रभावित निवासियों के लिये राहत सामग्री तिरपाल को लाभार्थियों के बीच वितरित करने के बजाय तृणमूल पार्टी के कार्यालयों में अवैध रूप से संग्रहीत किया गया था। उस समय, उन्होंने वरिष्ठ पार्टी नेताओं पर राहत सामग्री के कथित हेरफेर की सुविधा देने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि इन अनियमितताओं में सैंकड़ों करोड़ रुपये शामिल थे।

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