बेंगलुरु , अक्टूबर 28 -- कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को बड़ा झटका देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)- जनता दल (जद) :एस: गठबंधन ने शिक्षकों और स्नातकों के चुनाव क्षेत्रों की सभी चार कर्नाटक विधान परिषद सीटें जीत लीहैं।
इसमें जद (एस) ने बेंगलुरु शिक्षक सीट को सत्तारूढ़ कांग्रेस से छीन लिया है, जबकि भाजपा ने अपनी अन्य तीन सीटों पर कब्जा बरकरार रखा है।
मंगलवार को शुरू हुई मतगणना के बाद घोषित नतीजों में विपक्षी गठबंधन ने बेंगलुरु शिक्षक, उत्तर-पूर्व शिक्षक, पश्चिम स्नातक और दक्षिण-पूर्व स्नातक चुनाव क्षेत्रों में जीत दर्ज की। इन चार सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार मैदान में थे, जिन पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था।
यह परिणाम भाजपा और जद (एस) के चुनावी तालमेल से मिले फायदों को उजागर करता है, जिसके तहत भाजपा ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा और जद (एस) ने बेंगलुरु शिक्षक सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा था। अपनी इकलौती सीट बचाने और अन्य सीटों पर जीत हासिल करने के लिए प्रचार करने वाली कांग्रेस चारों में से एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।
सबसे दिलचस्प मुकाबला बेंगलुरु शिक्षक क्षेत्र में था, जहां जद (एस) उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने वर्तमान कांग्रेस एमएलसी पुत्तण्णा को 908 वोटों से हरा दिया। श्री रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि श्री पुत्तण्णा को 9,902 वोट मिले। इसके साथ ही 2024 के उपचुनाव के नतीजे पलट गए, जब कांग्रेस के टिकट पर लड़े पुत्तण्णा ने जद (एस) प्रत्याशी रंगनाथ को हराया था।
यह नतीजा जद (एस) के लिए बेहद अहम था, क्योंकि श्री पुत्तण्णा 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले इस क्षेत्रीय दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। दोनों उम्मीदवार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिससे यह मुकाबला एक साझा उम्मीदवार के पीछे समर्थन जुटाने की गठबंधन की क्षमता की परीक्षा बन गया था।
उत्तर-पूर्व शिक्षक चुनाव क्षेत्र में वर्तमान भाजपा विधान पार्षद शशिल जी नमोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को 3,297 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। श्री नमोशी को मत्तूर के 12,299 वोटों के मुकाबले 15,596 वोट मिले और उन्होंने इस क्षेत्र से अपनी पांचवीं जीत दर्ज की।
भाजपा ने पश्चिम स्नातक क्षेत्र में भी एसवी संकनूर के जरिए जीत हासिल की, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिम्बीकाई को 9,323 वोटों से हराया।
श्री संकनूर को 33,711 वोट मिले, जबकि लिम्बीकाई को 24,388 वोट हासिल हुए।
दक्षिण-पूर्व स्नातक चुनाव क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के एम सुरेश ने कांग्रेस प्रत्याशी शशि हुलिकुंटे मुत्त को 23,098 वोटों के अंतर से पराजित किया।
इन नतीजों के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और बैलेट पेपर के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। जद (एस) युवा मोर्चा के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए ध्यान दिलाया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत बेंगलुरु शिक्षक चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराया गया था।
सोशल मीडिया पोस्ट में निखिल ने सवाल किया कि जब शिक्षकों ने कागजी मतपत्रों से वोट दिया है तो कांग्रेस अपनी हार के लिए क्या सफाई देगी। उन्होंने श्री रंगनाथ के साथ-साथ भाजपा और जद (एस) के नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी उनके प्रयासों के लिए बधाई दी।
जद (एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने भी गठबंधन की जीत को अहम बताया और इन नतीजों को 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जोड़ने का प्रयास किया। उनकी टिप्पणियां चुनावी तालमेल और राजनीतिक बढ़त को प्रदर्शित करने की विपक्षी दलों की कोशिश को दर्शाती हैं।
कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने संभाली थी। इन चार मुकाबलों को शिक्षकों और स्नातकों के बीच कांग्रेस के समर्थन के साथ-साथ भाजपा और जद (एस) के एक-दूसरे के उम्मीदवारों को वोट ट्रांसफर कराने की क्षमता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।
इस झटके के बावजूद, इन नतीजों से राज्य सरकार की स्थिरता पर कोई असर पड़ने या 75 सदस्यीय विधान परिषद में सत्ता के संतुलन में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। चुनावों से पहले, पांच मनोनीत सीटों के खाली रहने के अलावा कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जद(एस) के छह सदस्य थे, जबकि एक निर्दलीय और सभापति शामिल थे। यह परिणाम विपक्षी दलों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करता है, लेकिन विधानसभा में कांग्रेस सरकार की स्थिति को प्रभावित नहीं करता।
गठबंधन का यह सूपड़ा साफ प्रदर्शन भाजपा और जद (एस) को अपने तालमेल को उजागर करने का मौका देता है, जबकि कांग्रेस को शिक्षकों और स्नातकों के संगठित समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन पर सवालों का सामना करना पड़ रहा है यह नतीजा। व्यापक राजनीतिक रुझानों को हालांकि किस हद तक दर्शाता है, इसका आकलन भविष्य के चुनावी मुकाबलों के आधार पर करना होगा।
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