वाराणसी , जुलाई 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' का शुभारंभ मंगलवार को उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से हुआ।

संत रविदास की जन्मस्थली की पावन माटी के पूजन, 131 कलशों में माटी संग्रह तथा भव्य कलश शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस अभियान के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता, मानव गरिमा और सामाजिक एकता का संदेश देशभर में पहुंचाने का संकल्प लिया गया। यह अभियान 29 जुलाई से 20 फरवरी तक संचालित किया जाएगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संत रविदास की प्रतिमा पर भाजपा नेताओं एवं संत-महात्माओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद रैदासी परंपरा के अनुसार जन्मस्थली की पवित्र माटी को विधि-विधान से 131 कलशों में भरकर उनका पूजन किया गया। पूजन के उपरांत निकली भव्य कलश शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

शोभायात्रा में सबसे आगे बैंड-बाजे चल रहे थे, जबकि उनके पीछे सुसज्जित घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे। पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में पीले रंग की साड़ी पहने 131 महिलाएं सिर पर पवित्र माटी से भरे कलश लेकर चल रही थीं। शोभायात्रा के अंत में फूलों से सुसज्जित बग्घी पर संत शिरोमणि गुरु रविदास का चित्र विराजमान था। शोभायात्रा का समापन संत रविदास मंदिर परिसर में हुआ, जहां पूजित कलशों को सुरक्षित रखा गया।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने कहा कि संत रविदास की जन्मस्थली की पावन माटी का पूजन कर उसे 131 कलशों में संग्रहित किया गया है। यह माटी देश के 20 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता और मानव कल्याण के विचार जन-जन तक पहुंचें तथा लोग उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास भक्ति आंदोलन के महान संत थे, जिन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने 'बेगमपुरा' की ऐसी कल्पना प्रस्तुत की, जहां किसी प्रकार का दुख, भेदभाव अथवा अन्याय न हो तथा प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। उन्होंने कहा कि संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित यह अभियान उनके विचारों को देशव्यापी स्तर पर पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

श्री चुग ने बताया कि बुधवार, 29 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की उपस्थिति में 27 राज्यों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र माटी से भरे कलश सौंपे जाएंगे। इसके बाद प्रतिनिधि इन कलशों को अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे और संत रविदास के विचारों तथा सामाजिक समरसता के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।

भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ऐसे समय में अवतरित हुए, जब भारतीय समाज सामाजिक विषमताओं और कुरीतियों से जूझ रहा था। उन्होंने अपने सरल एवं विनम्र जीवन तथा वाणी के माध्यम से यह संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, गुण और चरित्र से होती है। उन्होंने संत रविदास के संदेश 'एकै माटी के सभ भांडे' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समस्त मानवता की एकता का संदेश देता है तथा सामाजिक भेदभाव को समाज और राष्ट्र की कमजोरी मानता है।

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं वाराणसी के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि देशभर में करोड़ों लोग जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर संत शिरोमणि गुरु रविदास को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ स्मरण करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय समाज जातिगत भेदभाव, सामाजिक विषमता, धर्मांतरण और अत्याचार जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था, उस समय संत रविदास ने सामाजिक समरसता, समानता और आत्मसम्मान का संदेश देकर समाज में नई चेतना का संचार किया।

प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि संत रविदास ने अपना संपूर्ण जीवन जातिवाद और छुआछूत के विरुद्ध सामाजिक चेतना जागृत करने में समर्पित किया। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति जन्म से छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उसके कर्म और मानवता के प्रति उसके समर्पण से होती है।

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