पुणे , अक्टूबर 28 -- महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कौस्तुभ गावड़े ने पुणे प्रभाग शिक्षक सीट जीत ली है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे प्रभाग स्नातक चुनाव क्षेत्र में जीत दर्ज की है।

पश्चिमी महाराष्ट्र के पांच जिलों में हुए इस दिलचस्प चुनावी मुकाबले के नतीजे लगभग 28 घंटे चली लंबी मतगणना प्रक्रिया के बाद घोषित किये गये। शिक्षक क्षेत्र में श्री गावड़े का मुकाबला श्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप, राष्ट्रीय समाज पक्ष के दत्तात्रेय सावंत और वर्तमान कांग्रेस विधान पार्षद जयंत असगांवकर से था। श्री गावड़े ने प्रथम वरीयता के मतों की गिनती के दौरान शुरुआत से ही बढ़त बनाये रखी।

शिक्षक चुनाव क्षेत्र में कुल 51,511 वोट वैध घोषित किये गये, जिनमें जीत का कोटा 25,756 वोट तय था। पहली वरीयता के मतों में किसी भी उम्मीदवार को कोटा न मिलने के कारण सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशियों को चरणबद्ध तरीके से बाहर किया गया और उनके वोट दूसरी वरीयता के अनुसार स्थानांतरित किये गये।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद श्री गावड़े को विजयी घोषित कर दिया गया। वहीं स्नातक चुनाव क्षेत्र में महाविकास अघाड़ी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख जाधव ने मुख्य मुकाबले में भाजपा की डॉ स्मिता जाधव को पराजित किया। पहली वरीयता की गिनती में ही सुश्री हर्षदा ने बढ़त बना ली थी, जहां उन्हें डॉ स्मिता जाधव के 1,02,427 वोटों के मुकाबले 1,11,279 वोट मिले।

स्नातक क्षेत्र के लिए जीत का कोटा 1,13,113 वोट तय किया गया था, जिसे सुश्री हर्षदा ने अगले चक्र की मतगणना और वरीयता मतों के हस्तांतरण के बाद हासिल कर अपनी जीत पक्की की।

स्नातक चुनाव क्षेत्र में कुल 47 उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण मतगणना की प्रक्रिया काफी लंबी चली। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर जिलों में मतदान हुआ था।

दोनों चुनाव क्षेत्रों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी समर्थित उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

स्नातक क्षेत्र के 3,88,019 पंजीकृत मतदाताओं में से 2,43,611 ने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं शिक्षक क्षेत्र में 61,940 पंजीकृत मतदाताओं में से 53,185 लोगों ने वोट डाले। शिक्षक सीट का चुनाव सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर के मतभेदों को भी सामने ले आया, जहां शिंदे नीत शिवसेना ने भाजपा प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप का समर्थन किया था।

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