बेंगलुरु , मार्च 07 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं कर्नाटक के पूर्व उप मुख्यमंत्री सी. एन. अश्वथ नारायण ने शनिवार को 2026-27 के कर्नाटक बजट को 'निराशाजनक' बताते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल फोन या सोशल मीडिया उपयोग पर प्रस्तावित प्रतिबंध को भी योजना विहीन और अस्पष्टता भरा कदम करार दिया।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा शुक्रवार को पेश किये गये बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री नारायण ने कहा कि बजट में राज्य के विकास के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं और दिशा का अभाव है।
उन्होंने कहा, " यह एक निराशाजनक और प्रतिगामी बजट है। इसमें कोई स्पष्ट प्राथमिकताएं नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि बजट का एकमात्र उल्लेखनीय पहलू यह है कि यह मुख्यमंत्री द्वारा पेश किया गया 17वां बजट है। "नाबालिगों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए श्री नारायण ने कहा कि विचार सिद्धांत रूप में अच्छा हो सकता है, लेकिन सरकार ने इसके लिए कोई स्पष्ट नीति या क्रियान्वयन की रूपरेखा पेश नहीं की है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के यह घोषणा कर दी है और इसमें योजना या विवरण का अभाव है। उनके अनुसार यह प्रस्ताव मुख्य रूप से सुर्खियां बटोरने के लिए किया गया प्रतीत होता है।
श्री नारायण ने कहा कि नाबालिगों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करना एक जटिल विषय है और किसी भी प्रतिबंध को प्रभावी बनाने से पहले अभिभावकों, शिक्षकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ व्यापक परामर्श आवश्यक है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार इस तरह के कदम को कैसे लागू करेगी और क्या इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय तथा जागरूकता तंत्र तैयार किये गये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले जमीनी परिस्थितियों का अध्ययन कर एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार करना चाहिए। केवल घोषणाएं करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
श्री नारायण ने इसे बजट में 'सुर्खी आधारित घोषणाओं' की प्रवृत्ति से जोड़ते हुए कहा कि संपूर्ण वित्तीय वक्तव्य में स्पष्ट प्राथमिकताओं और दिशा का अभाव दिखाई देता है।
कर्नाटक सरकार ने बजट में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए उपायों का प्रस्ताव रखा है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य अत्यधिक स्क्रीन समय, ऑनलाइन सुरक्षा जोखिम और अनियंत्रित डिजिटल संपर्क के बच्चों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है।
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