मथुरा , मार्च 24 -- धर्मनगरी वृंदावन के रुक्मिणी विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को जनसंख्या, धर्मांतरण और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार व्यक्त किए।
स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज के आश्रम के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि देश को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या संतुलन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में जनसंख्या संरचना का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा और इस विषय पर नीति स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का जबरन मतांतरण स्वीकार्य नहीं है और इसे रोकने के लिए समाज को भी सजग रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग स्वेच्छा से अपने पूर्व धर्म में लौटना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
मध्य-पूर्व एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध अक्सर अहंकार और टकराव का परिणाम होते हैं तथा इनसे किसी का स्थायी लाभ नहीं होता। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं और आध्यात्मिक दृष्टिकोण विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकते हैं। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें ब्रजेश पाठक, मोहन यादव, तथा आरिफ मोहम्मद खान शामिल थे। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।
श्री भागवत ने कहा, "धर्म मनुष्य को पुरुषार्थ की दिशा देता है, जबकि कलह केवल नुकसान पहुंचाता है।" उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि संतों का मार्गदर्शन और ऐसे विचार समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक कल्याण का आधार बताया।
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