चंडीगढ़ , सितंबर 21 -- पंजाब में जल भराव सत्र समाप्त होने पर 20 सितंबर तक भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों में जलस्तर पिछले वर्ष के मुकाबले कम दर्ज किया गया है।
उपलब्ध पानी से तत्काल हालांकि किसी बड़े जल संकट की आशंका नहीं है, लेकिन पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को सिंचाई एवं पेयजल के लिए पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की जरूरत होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाखड़ा बांध में जलस्तर 1,643.92 फुट है, जो पिछले वर्ष के 1,677.56 फुट से 23.64 फुट कम है। पोंग बांध में जलस्तर 1,371.14 फुट दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 1,390 फुट था। रणजीत सागर बांध में जलस्तर 510.13 मीटर है, जो पिछले वर्ष के 524.61 मीटर से 14.48 मीटर कम है।
पिछले वर्ष पंजाब में भारी बारिश और बाढ़ के कारण भराव सत्र के अंत में ये जलाशय लगभग पूरी क्षमता तक भर गए थे। इस वर्ष बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर रही।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अनुसार, जून में अधिक भंडारण को देखते हुए सहयोगी राज्यों से सिंचाई के लिए पानी की निकासी बढ़ाने को कहा गया था, ताकि मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी के लिए भंडारण क्षमता बनाई जा सके। अब उपलब्ध भंडार को देखते हुए पानी की निकासी में कमी और विवेकपूर्ण उपयोग की जरूरत बताई गई है।
हिमाचल प्रदेश के तीन प्रमुख जलाशयों में कुल करीब 8,631 हेक्टेयर मीटर पानी है, जो उनकी संयुक्त क्षमता का लगभग 46.6 प्रतिशत है। पोंग बांध करीब 73.8 प्रतिशत भरा हुआ है, जबकि पंजाब में रणजीत सागर बांध में करीब 1,120 हेक्टेयर मीटर पानी है। अगले गर्मी के मौसम में बिजली उत्पादन भी कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है।
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