भरतपुर , अगस्त 12 -- राजस्थान में भरतपुर सम्भाग के ब्रज क्षेत्र में सावन की रिमझिम फुहारों के बीच रक्षाबंधन की तैयारियां तेज हो गई हैं।
रक्षाबंधन पर घर-घर में परोसे जाने वाले खास लजीज पकवान सेमईं बनाने की प्रक्रिया में जुटी महिलाओं की राह में मानसून की झमाझम बारिश रोड़ा तो बनी हुई है लेकिन मौसम साफ होने पर धूप निकलते ही महिलाएं आटा, मैदा या सूजी गूंथकर पारंपरिक हाथ की मशीन से सैमई बनाने में जुटी हुई हैं। घरों की छतों, चौक और आंगन में बिछे कपड़े या चादरों पर बड़ी तादाद में सूखती सेवईयों के नजारे बरबस ही लोगो का ध्यान आकर्षित कर रहे है।
ब्रज के ग्रामीण इलाकों में सेवई तैयार करने के लिए आटा गूंथने, सेवई तोड़ने और उन्हें अलग अलग कर धूप में सुखाने तक की प्रक्रिया में लोकगीतों की गूंज वातावरण को उत्सवी बनाये हुए है।
ब्रज में सेवई सिर्फ पकवान नहीं, बल्कि बेटियों के प्रति मायके के स्नेह और पीढ़ियों पुरानी रिश्तों की परंपरा का प्रतीक है। ब्रज की ग्रामीण संस्कृति में रक्षाबंधन पर बेटी और बहन के घर सेवई भेजने की परंपरा अब भी कायम है। परिवार की सामर्थ्य और रिश्तेदारी के अनुसार हाथों से बनी सेवई बेटी के घर भेजी जाती है। यह मायके की ओर से बेटी के लिए प्रेम, सम्मान और अपनत्व की सौगात मानी जाती है।
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