भरतपुर , सितम्बर 01 -- राजस्थान में भरतपुर जिले के निकाय चुनाव में राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न लेकर मैदान में उतरने के लिए मची आपाधापी के बावजूद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस को जिले की पालिकाओं, परिषदों एवं नगरनिगम के लिए उम्मीदवारों के टोटे पड़ गये।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसके चलते दोनो ही दलों ने कई जगहों पर कई कई वार्डों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे है।

सबसे रोचक स्थिति राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल के गृह क्षेत्र भरतपुर की नगरनिगम को लेकर सामने आयी है, जहां भाजपा ने निगम के 65 वार्डो में 57 और कांग्रेस ने 58 वार्डो में अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

राजनीतिक दलों के उम्मीदवार विहीन वार्डों में प्रत्याशियों ने भाजपा या कांग्रेस के उम्मीदवार की जगह निर्दलीय रूप में चुनाव लड़ने का फैसला लेते हुए इन दोनों ही दलों से टिकट तक नहीं मांगा। जिले की रूपवास नगर पालिका में कांग्रेस को अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त प्रत्याशी नहीं मिले। नगर पालिका के 25 वार्डों में भाजपा ने 19 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने सिर्फ नौ वार्डों में प्रत्याशी घोषित किये हैं।

पार्टी से टिकट की दावेदारी करने वाले कई लोगों ने कांग्रेस से टिकट लेने की बजाय निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे पहले रूपवास नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड बना था। भाजपा का बोर्ड बनने के करीब 30 मिनट के अंदर पूरे बोर्ड का कांग्रेस में विलय हो गया था। इसके बावजूद इस बार नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस को अपने प्रत्याशी नहीं मिल पाये।

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