नयी दिल्ली , मार्च 30 -- गुरु सिंधु मिश्रा की शिष्या तनुषा त्यागी ने यहां आयोजित भरतनाट्यम का भावपूर्ण एकल नृत्य प्रदर्शन पेश किया।

इस प्रस्तुति में शिव-पार्वती की लौकिक जोड़ी के माध्यम से लौकिक, भक्तिपूर्ण और मानवीय प्रेम को दर्शाया गया।

एक पारंपरिक 'मार्गम' के रूप में तैयार किये गये इस कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को गणेश और शिव की वंदना के साथ हुई। राग नाटा में निबद्ध 'गणेश कृति' ने मांगलिक वातावरण तैयार किया। इसमें तनुषा की जीवंत मुद्राओं में भगवान की प्रार्थना का आनंद और वर्षों के कठिन अभ्यास की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

इसके बाद राग रेवती में 'भो शंभो' की प्रस्तुति दी गयी, जहां नृत्यांगना की भंगिमाएं कभी स्थिरता तो कभी तरलता के बीच बदलती रहीं। इसमें शिव को न केवल लौकिक नर्तक के रूप में, बल्कि एक दयालु और सर्वव्यापी शक्ति के रूप में आह्वान किया गया। मुख्य प्रस्तुति 'पद वर्णम' थी, जो रामचरितमानस से प्रेरित थी। इसमें त्यागी ने बड़ी ईमानदारी के साथ 'नृत्य' और 'अभिनय' की दोहरी मांगों को पूरा करते हुए माता पार्वती की अडिग भक्ति का प्रदर्शन किया।

पार्वती की तपस्या और सप्तऋषियों द्वारा उनकी परीक्षा के प्रसंग को भावनात्मक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया गया।

एक अनूठी प्रस्तुति 'पदम' के रूप में सामने आयी, जो पुनः रामचरितमानस से ली गयी थी। इसमें शिव और पार्वती के विवाह को 'मातृ दृष्टि' से चित्रित किया गया।

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