भदोही , अप्रैल 28 -- कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल द्वारा सोमवार को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा देने हेतु कालीन भवन में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें निर्यातकों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) एवं द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (बीटीए) की विस्तार से जानकारी दी गई।
इस दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने इन समझौतों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान उद्योग के विकास, नवाचार तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की पहचान को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर अमित कुमार, निदेशक, वस्त्र मंत्रालय ने अपने संबोधन में कहा कि, "एफटीए और बीटीए भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों के द्वार खोल रहे हैं। विशेष रूप से हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र के लिए ये समझौते प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।" उन्होंने भदोही के कालीन निर्यातकों के लिए वर्ष 2030 तक 2 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही।
उन्होंने विभिन्न प्रकार के ट्रेड एग्रीमेंट के विषय में विस्तार से चर्चा की, जिसमें प्रमुख रूप से अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक समझौतों और उनसे मिलने वाले निर्यात अवसरों पर भी चर्चा किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित