हरिद्वार , अगस्त 02 -- उत्तराखंड के हरिद्वार में संत समाज का आक्रोश संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर लगातार बढ़ता जा रहा है।

रविवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी और अखंड परशुराम अखाड़े के संतों एवं पदाधिकारियों ने पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए इसे सनातन परंपरा और भगवा संस्कृति का अपमान बताया।

प्रदर्शन के दौरान दोनों सांसदों के भिखारी स्वरूप वाले पोस्टर लगाए गए। संतों और तीर्थ पुरोहितों ने पोस्टरों के सामने कटोरों में सिक्के डालकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोनों सांसद सार्वजनिक रूप से सनातन समाज से क्षमा याचना करें। ऐसा न होने पर आगामी हरिद्वार, उज्जैन और नासिक कुंभ सहित सभी धार्मिक आयोजनों में उनके बहिष्कार की चेतावनी दी गई।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव श्री महंत डॉ. रवींद्र पुरी ने कहा कि भगवा वस्त्र त्याग, तपस्या और सनातन परंपरा का प्रतीक है। संसद परिसर में इसे राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाना करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू यादव सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं तो कुंभ मेलों में संत समाज उनका कड़ा विरोध करेगा।

वहीं, अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और वहां इस प्रकार का प्रदर्शन संसदीय गरिमा के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं और विकास के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग करना चाहिए। भगवा का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान संत समाज ने एक स्वर में कहा कि धार्मिक आस्थाओं और प्रतीकों का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है। संतों ने चेतावनी दी कि यदि विवादित कृत्य पर शीघ्र माफी नहीं मांगी गई तो देशभर के सनातन संगठनों के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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