वायनाड , जुलाई 12 -- केरल के वायनाड स्थित प्राचीन श्री तिरंनेल्ली महाविष्णु मंदिर प्रशासन ने आठ करोड़ रुपये की लागत से चुट्टंबलम (परिक्रमा मंडप) के जीर्णोद्धार परियोजना के लिए भक्तों से आर्थिक सहयोग देने का अनुरोध किया है, ताकि मंदिर की प्राचीन स्थापत्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध एवं अंतिम संस्कार किया था तथा जिसके निकट स्थित गुन्निक्कन मंदिर का संबंध परंपरागत रूप से ऋषि अगस्त्य से माना जाता है।

मंदिर के ट्रस्टी पीबी केशवदास ने कहा कि इसके लिए 2018 में धन जुटाने का अभियान शुरू होने के बाद से भक्तों की समिति ने अब तक 3.5 करोड़ रुपये जुटाए हैं और देशभर के भक्तों से बाकी काम पूरा करने के लिए आर्थिक मदद देने का अनुरोध किया गया है।

राज्य के वायनाड की ब्रह्मगिरि पहाड़ियों में बसा श्री तिरुनेल्ली महाविष्णु मंदिर 'दक्षिण की काशी' के रूप में विख्यात है और माना जाता है कि यह 5,000 साल से भी अधिक पुराना है। हिंदू परंपरा में इस मंदिर का एक खास स्थान है क्योंकि यह हिंदू त्रिमूर्ति भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा से जुड़ा है। मंदिर की कथाओं के अनुसार ब्रह्मा ने ब्रह्मगिरि के जंगलों से गुजरते हुए एक आंवले (नेल्ली) के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु की मूर्ति खोजी थी और मंदिर की स्थापना की थी, जिसे 'तिरुनेल्ली' नाम दिया गया।

श्री केशवदास ने कहा कि मंदिर की बाहरी दीवार का जीर्णोधार एक बड़े मास्टर प्लान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य मंदिर की सदियों पुरानी वास्तुकला और मूर्तिकला की विरासत को बचाना और साथ ही बढ़ती संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना है। नयी दीवार ग्रेनाइट और तांबे की चादरों से ढकी सागौन की लकड़ी की छत के साथ बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की दीवार और कार्यालय भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर की बाहरी दीवार और रसोईघर का काम पहले ही शुरू हो गया था, जबकि मास्टर प्लान के तहत आंशिक रूप से नवीनीकृत विलक्कुमाडम, पापनासिनी सड़क, श्रीकोविल और नमस्कार मंडपम का काम भी पूरा किया जाएगा।

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