उज्जैन , अगस्त 31 -- मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में श्रावण-भादो मास में निकलने वाली भगवान श्री महाकालेश्वर की परंपरागत सवारी सोमवार को आस्था, उत्साह और उमंग के साथ निकली। सवारी में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए और उन्होंने रामघाट पर भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी का पूजन-अर्चन किया।
परंपरा अनुसार श्रावण-भादो मास में निकलने वाली पांचवीं सवारी में भगवान श्री महाकालेश्वर पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप, हाथी पर श्री मनमहेश स्वरूप तथा गरुड़ रथ पर श्री शिव-तांडव स्वरूप में विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले।
सवारी निकलने से पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में पुजारियों द्वारा भगवान का पूजन-अर्चन एवं आरती संपन्न कराई गई। इसके बाद भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों तथा श्री महाकालेश्वर बैंड ने पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी।
सवारी मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने 'भोले शंभु-भोलेनाथ' और 'अवंतिकानाथ' के जयघोष के साथ भगवान पर पुष्पवर्षा की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु झांझ, मंजीरे, ढोल और भगवान के प्रिय वाद्य डमरू बजाते हुए सवारी में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री यादव सवारी में शामिल होने के लिए हेलीकॉप्टर से उज्जैन पहुंचे। हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। डॉ. यादव नाव से दत्त अखाड़ा क्षेत्र पहुंचे और वहां से रामघाट पर पालकी पूजन के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री ने क्षिप्रा नदी के जल से भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान रामघाट पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई।
इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
विभिन्न बैंड दल सवारी मार्ग पर अपनी प्रस्तुतियां देते हुए चले और रामघाट पर भी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। सवारी के साथ भजन मंडलियां शिव भजनों की मधुर प्रस्तुतियां देती हुई चल रही थीं।
श्रद्धालुओं ने सुगमता से भगवान के दर्शन किए। सवारी के आगे और पीछे दो एलईडी रथ भी चलाए गए, जिनके माध्यम से सवारी का सीधा प्रसारण किया गया। इससे सवारी मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के सुगमता से दर्शन हो सके।
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