वाराणसी , अप्रैल 30 -- ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को कहा कि भगवान् श्रीराम और भगवान् श्रीकृष्ण के जन्म के मूल में गौमाता ही रही हैं।

शंकराचार्य ने श्रीविद्यामठ में आयोजित एक समारोह में गौप्रहरी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। श्रीगुरुकुलम न्यास द्वारा गौमाता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता का दर्जा दिलाने, भारत से गोकशी पूर्णतः बंद कराने तथा गौमाता के संरक्षण के लिए जनजागरण करने के उद्देश्य से वाराणसी जिले के विद्यालयों में गौप्रहरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में कक्षा 3 से कक्षा 12 तक के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता को मात्र एक पशु के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और सृष्टि की पोषिका तथा आधारशिला के रूप में देखा गया है। वैदिक परंपरा से लेकर आधुनिक काल तक गौमाता भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है।

उन्होंने कहा कि गौमाता की महिमा केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, अपितु उनका संरक्षण सम्पूर्ण मानवता और सृष्टि के कल्याण से जुड़ा है। भारत की आजादी के आंदोलन का सूत्रपात भी गौमाता के संरक्षण और उनके प्रति सम्मान की भावना से ही हुआ था।

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