जालंधर , फरवरी 20 -- पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार की बहुप्रचारित 10 लाखरुपये की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम को लेकर आम जनता, हेल्थकेयर प्रोवाइडर और मरीजों के बीच इसके असल दायरे और कवरेज को लेकर गंभीर चिंताएंऔर भ्रम पैदा हो रहे हैं।

श्री खैरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर कहा कि वे पंजाब सरकार द्वारा घोषित एवं बहुप्रचारित 10 लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के दायरे के बारे में तुरंत स्पष्टीकरण दें। उन्होंने कहा कि इस स्कीम को पंजाब के लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर पेश किया गया है। आम जनता, हेल्थकेयर प्रोवाइडर और मरीजों के बीच इसके असल दायरे और कवरेज को लेकर गंभीर चिंताएं और भ्रम पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि इस स्कीम के तहत लगभग 2,356 बीमारियां कवर होंगी और हर बीमारी के लिए पहले से ही एक ऊपरी वित्तीय सीमा तय कर दी गयी है। अगर यह सच है, तो ऐसे मामलों में जहां इलाज का असल खर्च तय पैकेज रेट से ज़्यादा होगा, मरीजों को बाकी रकम अपनी जेबसे देनी होगी। इससे 10 लाख रुपये तक का पूरा और कैशलेस हेल्थ कवरेज देने का मकसद ही खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, यह भी चिंता की बात है कि इस स्कीम का पूरे देश में विज्ञापन और एक अभियान के ज़रिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा रहा है, जिससे यह धारणा बन रही है कि यह एक राष्ट्रीय योजना है। अगर यह योजना सिर्फ़ पंजाब राज्य तक ही सीमित है, तो इस तरह की नेशनल पब्लिसिटी इसके मकसद और इस पर होने वाले खर्च पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। राज्य पहले से ही वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, तो पंजाब के बाहर बड़े पैमाने पर प्रचार के बजाय पारदर्शी और असरदार कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने पूछा कि क्या 10 लाख रुपये का कवरेज सालाना परिवार सीमा है, या यह हर बीमारी के लिए अलग पैकेज लिमिट के तहत आता है? अगर हॉस्पिटल का चार्ज तय पैकेज रेट से ज़्यादा होता है, तो क्या मरीज़ों को अपनी जेब से पैसे देने होंगे। सूचीबद्ध किये गये 2,356 इलाजों और उनकी योग्यता, खासकर गंभीर और जानलेवा बीमारियों के लिए तय पैकेज रेट का आधार क्या है? निजी अस्पतालों को इलाज से मना करने या लाभार्थी से अतिरिक्त पैसे मांगने से रोकने के लिए क्या तंत्र है।

श्री खैरा ने कहा कि लोगों के एक बड़े हिस्से की आर्थिक कमजोरी को देखते हुए, यह बहुत ज़रूरी है कि यह स्कीम पूरी पारदर्शिता के साथ और बिना किसी छिपी सीमा के 'पेशेंट-फ्रेंडली' तरीके से चलायी जाये।

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