पटना , सितंबर 12 -- िहार के पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर धूम मचाने के लिए तैयार हैं। इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन में देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों को बिहार का ठेंठ देसी स्वाद चखने को मिलेगा। ब्रांड बिहार को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में सत्तू और मखाना की भूमिका बेहद अहम है। ब्रिक्स सम्मेलन के स्वागत में मेहमानों को सत्तू और मखाना जैसे बिहार के स्थानीय उत्पादों की खास मौजूदगी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के बीच इन उत्पादों की प्रस्तुति के जरिए बिहार की पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की वैश्विक संभावनाओं को सामने रखा जाएगा।

बिहार के खान-पान में सत्तू पूरी तरह से रचा-बसा है और यह अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा की बात हो या देसी हॉर्लिक्स के नाम से महशूर ड्रिंक घोला हुआ सत्तू, यह कई तरह से स्थानीय लोगों के रोजाना के खानपान में शामिल है। वहीं, मखाना राज्य के प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल है और पिछले कुछ वर्षों में देश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग बढ़ी है। वर्ष 2025-26 में देश का मखाना उत्पादन 80 हजार 590 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। जबकि औसत उत्पादकता 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही थी। इसी तरह 2024-25 में कृषि विभाग के आंकलन के अनुसार , देशभर में मखाना का उत्पादन 63 हजार 910 मीट्रिक टन हुआ था। इसका औसतन उत्पादन 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर था। बिहार में देशभर के कुल उत्पादन का 90 फीसदी मखाना का उत्पादन होता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित