जयपुर , अगस्त 06 -- केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने तेजी से बदलते परिवेश में, आकांक्षाओं को व्यावहारिक नवाचार और सहयोग में बदलना बेहद जरूरी बताते हुए बल दिया है कि ब्रिक्स देशों को मजबूत और आत्मनिर्भर उद्योग खड़े करने के लिए अपनी एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का लाभ उठाना चाहिए।

श्री गोयल भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित दसवें ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों के सम्मेलन में बोल रहे थे। साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि नयी औद्योगिक क्रांति के लिए ब्रिक्स साझेदारी इस सहयोग का मुख्य माध्यम बन चुकी है।

उन्होंने उल्लेख किया कि ब्रिक्स की यात्रा 2009 में येकातेरिनबर्ग, रूस में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन के साथ शुरू हुई थी। उन्होंने 2025 में अध्यक्षता के दौरान ब्राजील के नेतृत्व की सराहना की और दोहराया कि भारत एक निरंतर, सक्रिय और व्यावहारिक दृष्टिकोण के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता निरंतरता बनाये रखने के साथ-साथ व्यवसायों, निवेशकों और नवोन्मेषकों के बीच विश्वास बढ़ाने तथा ऐसे व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है जो सभी ब्रिक्स सदस्यों के लिए ठोस परिणाम दे सके।

उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स साझेदारी के तहत हासिल की गयी महत्वपूर्ण प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने भारत द्वारा तय किये गये चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एडवाइजरी ग्रुप और वर्किंग ग्रुप्स द्वारा की गयी व्यापक चर्चाओं के परिणामों को भी रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को गहरा करने के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र स्थापित करना है।

इनमें एसएमई वर्किंग ग्रुप में सहयोग के लिए फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देना, फोटोवोल्टिक उद्योग पर वर्किंग ग्रुप के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' और एक्शन प्लान को अपनाना और स्टार्टअप्स द्वारा इनोवेशन-आधारित विकास के लिए एक्शन प्लान को अंतिम रूप देना शामिल था। इसके अलावा, मजबूत उद्योग-संबंधी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सिस्टम के महत्व पर भी जोर दिया गया, जिसमें जीआईएस-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और सिटी लॉजिस्टिक्स प्लानिंग शामिल हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच मजबूत औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने एक मजबूत, सतत और समावेशी औद्योगिक भविष्य के निर्माण में सहयोग, नवाचार और आपसी विश्वास की भूमिका को रेखांकित किया।

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