भुवनेश्वर , जून 01 -- ओडिशा के पुरी में तीन से पांच जून तक ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की दूसरी तकनीकी बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में मुख्य रूप से आपदा जोखिम को कम करने के लिए बजट, मजबूत बुनियादी ढांचे, पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई और आपदा प्रबंधन में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि आपदा प्रबंधन, चक्रवात प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों के क्षेत्र में ओडिशा की दुनिया भर में सराहना होती है। इसी कामयाबी को देखते हुए राज्य को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी के लिए चुना गया है।

इस आयोजन को ओडिशा और विशेष रूप से पुरी के लिए गर्व की बात बताते हुए श्री पुजारी ने कहा कि इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और उनके सहयोगी देशों के नीति निर्माता, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि आपदा के खतरों को कम करने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत किया जा सके।

चार जून को होने वाले उद्घाटन सत्र में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। तीन दिनों तक चलने वाली इस चर्चा में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ-साथ भारत के विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञ भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक का मुख्य विषय 'नवाचार, सहयोग और निरंतरता के माध्यम से आपदा लचीलापन बढ़ाना' रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया शामिल हैं। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

श्री पुजारी ने बताया कि ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक 29-30 अप्रैल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की अध्यक्षता में ऑनलाइन आयोजित की गई थी।

पुरी में होने वाली इस चर्चा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन, आपदा से निपटने के लिए बजट की व्यवस्था को मजबूत करना, कई तरह के खतरों की पहले से चेतावनी देने वाली प्रणालियां, मौसम के बदलावों को झेलने लायक बुनियादी ढांचा, प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित समाधान तथा आपदा प्रबंधन में विज्ञान, तकनीक एवं नए आविष्कारों की भूमिका शामिल हैं।

मंत्री के अनुसार, इस बैठक से ब्रिक्स देशों के बीच आपदा प्रबंधन को लेकर सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है। इसके जरिए तकनीकी रिपोर्ट और नीतियां तैयार की जाएंगी, बजट के बेहतर मॉडल और नए समाधान खोजे जाएंगे और सदस्य देशों के बीच एक-दूसरे के साथ अनुभव साझा करने की व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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