संयुक्त राष्ट्र , अगस्त 28 -- बोस्नियाई सर्ब युद्ध अपराधी रात्को म्लादिच का द हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के जेल अस्पताल में 84 वर्ष की आयु में मौत हो गयी।
बीबीसी न्यूज के अनुसार, अदालत ने उसे 1992-95 के पूर्व युगोस्लाविया युद्ध के दौरान जनसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए 2017 में उम्रकैद की सजा सुनायी थी।
संयुक्त राष्ट्र अदालत ने 2021 में उसकी अपील खारिज कर इस सजा को बरकरार रखा था।
बोस्नियाई युद्ध के बाद म्लादिच 16 वर्षों तक फरार रहा। आखिरकार 2011 में पुलिस ने उन्हें सर्बिया के गांव से खोज निकाला। इसके बाद नीदरलैंड के शहर द हेग में उन पर मुकदमा चला।
'बुचर ऑफ बोस्निया' (बोस्निया का कसाई) के नाम से कुख्यात म्लादिच को यूएन हिरासत केंद्र के अस्पताल में अंतिम समय की देखभाल दी जा रही थी, जहां उसने अंतिम सांस ली।
गुरुवार को मौत की पुष्टि करते हुए यूएन अदालत ने बताया कि नीदरलैंड के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने म्लादिच की मृत्यु की परिस्थितियों की पूरी जांच का आदेश दिया है।
मई में अदालत ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके म्लादिच की जेल से रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी। न्यायाधीश ने माना कि उसकी स्थिति गंभीर थी, लेकिन फैसला सुनाया था कि उसे जेल में पूरा और मानवीय उपचार मिल रहा है।
म्लादिच के वकीलों के अनुसार, वह लंबे समय से बिस्तर पर था और बाद में स्ट्रोक आने से बोलने में भी लगभग असमर्थ हो गया था।
म्लादिच यूएन अदालत को वैध नहीं मानता था, हालांकि उसके अपराधों का केस वहीं चला और वह 2011 से ही 'द हेग हिरासत केंद्र' में ही बंद रहा।उसने 1990 के दशक में बोस्नियाई क्रोएशियाई और बोस्नियाई मुस्लिम सेनाओं के खिलाफ बोस्नियाई सर्ब बलों की कमान संभाली थी। युद्ध के दौरान उसकी सेनाओं ने गैर-सर्बियाई आबादी को जबरन बाहर निकालने के लिए 'जातीय सफाई' का अपराध किया था। उसकी सेना ने मुख्य शहर सारायेवो को घेरा, जिसमें 10,000 से अधिक लोग मारे गये। इसके अलावा, उसने स्रेब्रेनिका में 8,000 पुरुषों और लड़कों का नरसंहार किया था।
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