ईटानगर , अप्रैल 06 -- रुणाचल प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) के अध्यक्ष बोसीराम सिरम ने सोमवार को मुख्यमंत्री पेमा खांडू से तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

यह मांग सार्वजनिक ठेकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से प्रारंभिक जांच कराने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद की गई है।

न्यायालय ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी करने और अपनी रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि पूर्ण जांच की आवश्यकता है या नहीं। इसके तहत जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 के बीच दिए गए अनुबंधों की जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर विस्तार किया जा सकता है।

न्यायालय ने राज्य सरकार को जांच में पूर्ण सहयोग करने, चार सप्ताह के भीतर सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि मामले से संबंधित कोई भी दस्तावेज नष्ट न हो। इसके अतिरिक्त, सीबीआई के साथ समन्वय की सुविधा के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि अनुबंध मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी फर्मों को दिए गए थे।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश का स्वागत करते हुए, एपीसीसी अध्यक्ष ने इसे एक 'ऐतिहासिक हस्तक्षेप' बताया और कहा कि यह राज्य में भाजपा सरकार पर एक गंभीर आरोप है।

श्री सिरम ने आरोप लगाया कि यह जांच कथित तौर पर 1,270 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंधों से संबंधित है, जो मुख्यमंत्री से जुड़े व्यक्तियों को दिए गए थे। उन्होंने इसे 'घोर सार्वजनिक विश्वासघात' करार दिया तथा भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग पर चिंता जताई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए सार्वजनिक संसाधनों के कथित विचलन का मुद्दा लगातार उठाया था। उच्चतम न्यायालय के आदेश ने अब उन चिंताओं की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं लोकतांत्रिक शासन को कमजोर करती हैं और जनता के विश्वास को खत्म कर देती हैं।

श्री सिरम में कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति राज्य सरकार की तथाकथित जीरो टॉलरेंस की नीति इन घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में महज एक ढोंग प्रतीत होती है। उन्होंने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच के परिणाम आने तक नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की।

एपीसीसी अध्यक्ष ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी अनुचित प्रभाव को रोकने के लिए न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की भी मांग की। उन्होंने अदालत के निर्देशों के सख्त अनुपालन का भी आग्रह किया, जिसमें सभी आधिकारिक रिकॉर्ड का संरक्षण और जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग शामिल है।

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