नयी दिल्ली , जुलाई 15 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने रेखा गुप्ता सरकार पर बोरवेल, ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पर मीटर के नाम पर जजिया कर थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार को ऐसी किसी भी नीति को लागू करने के बजाय दिल्लीवासियों को पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी राजधानी के नागरिकों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है, लेकिन आज भी वह दिल्ली की जरूरत के अनुरूप पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। ऐसे में जिन लोगों ने भारी खर्च करके अपने घरों में बोरवेल, ट्यूबवेल और सबमर्सिबल लगवाये हैं तथा उनके रखरखाव पर भी लगातार खर्च कर रहे हैं, उन पर मीटर और शुल्क लगाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के समर एक्शन प्लान-2026 के अनुसार जल बोर्ड के विभिन्न जल शोधन संयंत्रों से 867 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है, जबकि रैनी वेल और ट्यूबवेल के माध्यम से 135 एमजीडी भूजल प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार दिल्ली जल बोर्ड की कुल जलापूर्ति 1,002 एमजीडी है, जिसमें लगभग 13 से 14 प्रतिशत हिस्सा भूजल से आता है।
डॉ. कुमार ने कहा कि दिल्ली को प्रतिदिन लगभग 1,350 एमजीडी पानी की आवश्यकता है, जबकि सरकार केवल लगभग 900 एमजीडी पानी ही उपलब्ध करा पा रही है। ऐसे में करीब 350 एमजीडी पानी की कमी बनी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कमी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?उन्होंने कहा कि जब दिल्ली सरकार स्वयं 6,290 ट्यूबवेल संचालित कर भूजल का उपयोग कर रही है, तो आम नागरिकों द्वारा लगाए गए बोरवेल और ट्यूबवेल पर मीटर लगाकर शुल्क वसूलने का औचित्य क्या है? सरकार को पहले पानी की कमी दूर करनी चाहिए, न कि नागरिकों पर नया कर लगाना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने दिल्ली सरकार और जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह से मांग की कि बोरवेल, ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पर मीटर एवं शुल्क लगाने की प्रस्तावित नीति को न लाया जाये तथा पानी माफियाओं पर लगाम लगाने के साथ ही राजधानी के सभी नागरिकों को पर्याप्त, स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जायें।
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