बैतूल , अक्टूबर 24 -- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के बोरदेही में स्वामित्व योजना के तहत आबादी की जमीन के मालिकाना हक और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने को लेकर उपजा विवाद अब सिविल कोर्ट पहुंच गया है।

अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए संबंधित पटवारी और नायब तहसीलदार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। दोनों अधिकारियों को 27 अक्टूबर 2026 को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी की गलती या लापरवाही साबित नहीं हुई है।

यह पूरा विवाद बोरदेही के मुख्य बाजार चौक की आबादी भूमि के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि से जुड़ा है। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शिवम उपाध्याय ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश एक नियम 10 के तहत संबंधित राजस्व अधिकारियों को भी मामले में पक्षकार बनाने का आवेदन दिया है, साथ ही विवादित जमीन के संरक्षण की मांग की है। आगामी 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान इन अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने की उम्मीद है। कानूनी जानकारों का स्पष्ट मानना है कि अदालत द्वारा नोटिस जारी होना और किसी अधिकारी पर दोष सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं।

राज्य में स्वामित्व योजना के दस्तावेजों को तैयार करने में पटवारियों की भूमिका को लेकर पहले भी विरोध के स्वर उठ चुके हैं। पटवारियों में इस बात की गहरी चिंता है कि भूमि विवाद सामने आने पर उन्हें कानूनी मामलों में घसीटा जा सकता है और पक्षकार बनाया जा सकता है। जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष मोहनलाल धुर्वे के मुताबिक, जिले में अब तक करीब 7,000 से 8,000 रजिस्ट्रियां ही हो पाई हैं, जबकि कुल लक्ष्य 1,15,000 रजिस्ट्रियों का है। कानूनी कार्रवाई का सामना करने की आशंका के चलते पटवारियों में भय का माहौल है।

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