मुंबई , जुलाई 08 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेत्री और इंडियन प्रीमियर लीग टीम की सह-मालकिन प्रीति जिंटा को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए गूगल, मेटा और अन्य ऑनलाइन मंचों को उनकी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है, जिसे कथित तौर पर उनकी इजाजत के बिना उनकी पहचान का इस्तेमाल किया गया है।
न्यायमूर्ति माधव जामदार ने प्रीति जिंटा की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। याचिका में दावा किया गया था कि लगभग 275 यूट्यूब लिंक में एआई द्वारा तैयार, रूपांतरित या संपादित की गई ऐसी छवियां और वीडियो शामिल हैं, जिनमें उनके चेहरे और रूप-रंग का उपयोग किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि इस सामग्री ने उनके व्यक्तित्व, प्रचार और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
प्रीति जिंटा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने न्यायालय को बताया कि एआई ने डीपफेक वीडियो को बहुत अधिक वास्तविक बना दिया है। इससे लोगों को नकली और असली सामग्री के बीच अंतर बताना मुश्किल हो गया है। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि एआई से बनी सामग्री का दुरुपयोग किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने ऑनलाइन मंचों को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत उचित सावधानी बरतने की उनकी जिम्मेदारी की भी याद दिलाई।
न्यायालय ने उल्लेख किया कि प्रीति जिंटा ने फिल्म उद्योग में 25 से अधिक वर्षों तक काम किया है और 40 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है, जिससे उनकी एक सशक्त सार्वजनिक पहचान बनी है। न्यायालय ने कहा कि एआई से बनी सामग्री में उनकी छवि, रूप-रंग और तौर-तरीकों का अनाधिकृत उपयोग उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकता है और उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है। ये अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के अधिकार की रक्षा करते हैं।
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