मुंबई , अगस्त 11 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ विनियामक शक्तियों के 'सख्त' प्रयोग पर मंगलवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को कड़ी फटकार लगायी।
न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखाड की पीठ कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एफडीए के उन आदेशों को चुनौती दी गयी थी, जिनके तहत कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गयी थी तथा लगभग 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त कर लिया गया था।
कैडिला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने दलील दी कि आदेश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया था। यह कार्रवाई एसिलॉक 150, एसिलॉक 150 प्लस, एसिलॉक 300 और एसिलॉक 300 प्लस तथा अन्य दवाओं से संबंधित थी। याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील नेहा भिड़े ने एफडीए की कार्रवाई का बचाव किया और तर्क दिया कि सक्रिय औषधीय अवयवों में अंतर होने के बावजूद दवाओं की ब्रांडिंग में समानता के कारण भ्रम की स्थिति बनने की संभावना थी। उन्होंने इन कदमों को निरोधात्मक बताते हुए मनमानी की बात से इनकार किया।
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