नागपुर , जुलाई 11 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने नागपुर नगर निगम (एनएमसी ) से हिंसा के आरोपी फहीम खान का घर गिराने को लेकर कड़े सवाल पूछे।
न्यायालय ने पूछा कि दूसरे अवैध निर्माणों के खिलाफ़ ऐसी तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। न्यायाधीश अनिल किलोर और राज वाकोडे की खंड पीठ ने नगर निगम को दो हफ़्ते के अंदर एक विस्तृत हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इसमें उस अधिकारी का नाम बताना होगा जिसने घर गिराने का आदेश दिया था, नोटिस जारी करने के 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करने की वजहें बतानी होंगी, और उन दूसरे मामलों की जानकारी देनी होगी जिनमें इसी तरह तेज़ी से घर गिराने की कार्रवाई की गई थी।
न्यायालय ने कहा कि अवैध निर्माण से जुड़े कई मामलों में अधिकारी नोटिस जारी करने के बाद भी सालों तक कोई कार्रवाई नहीं करते, लेकिन मार्च 2025 की नागपुर हिंसा के बाद खान का घर गिराने में उन्होंने असामान्य तेज़ी दिखायी। यह याचिका खान की माँ ज़हरूनिसा खान और एक अन्य आरोपी अब्दुल हफ़ीज़ के पुत्र अयाज़ शेख ने दायर की है। उन्होंने हिंसा के बाद एनएमसी द्वारा अपनी घर गिराए जाने को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि घर गिराने की कार्रवाई उच्चतम न्यायालय की नवंबर 2024 के दिशानिर्देश का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत के दिशानिर्देश के मुताबिक, कोई भी निर्माण गिराने से पहले पर्याप्त नोटिस देना, जवाब देने का मौका देना और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ज़रूरी है। किसी व्यक्ति का घर सिर्फ़ इसलिए नहीं गिराया जा सकता क्योंकि वह किसी आपराधिक मामले में आरोपी है।
उच्च न्यायालय ने पहले भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और स्पष्टीकरण माँगा था कि क्या वह गिराए गए घर को दोबारा बनाना चाहता है या प्रभावित परिवार को मुआवज़ा देना चाहता है। एनएमसी ने उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश का पालन न करने के लिए कोर्ट के सामने बिना शर्त माफ़ी भी माँगी थी।
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