मुंबई , अक्टूबर 19 -- बंबई उच्च न्यायालय 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के निर्देश के खिलाफ अभिनेता इमरान खान की ओर से दायर याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने इमरान खान को नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया है। पुलिस ने यह नोटिस मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में इमरान खान के शामिल होने के बाद जारी किया था।

इमरान खान (43) अभिनेता आमिर खान के भांजे हैं और अमेरिकी नागरिक है। उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) की ओर से कारण बताओ नोटिस भी मिला है। इसमें पूछा गया है कि उनका प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) का दर्जा रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने सोमवार सुबह याचिका प्राप्त होने के बाद जवाब देने के लिए समय मांगा। श्री धोंड ने भारत छोड़ने की समयसीमा नजदीक होने का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की और खान को महाराष्ट्र सरकार को भी मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया।

श्री धोंड ने दलील दी कि खान दो वर्ष की उम्र से भारत में रह रहे हैं और उनके खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला दर्ज है और न ही कोई मामला लंबित है। उन्होंने कहा कि अभिनेता विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि उन्हें बीच रास्ते में हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया।

खान ने अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन और एमजेडएम लीगल के माध्यम से 17 अक्टूबर को उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने नोटिस को अवैध, मनमाना, असंगत और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया है।

उन्होंने विरोध प्रदर्शन के आयोजकों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है और नोटिस रद्द करने, अंतरिम राहत देने तथा उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

पुलिस ने 10 अक्टूबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर दिल्ली में चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान अगस्त क्रांति मैदान के पास खान को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से किया जा रहा था।

अधिकारियों ने आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा 7(2)(सी) और 29 लागू की हैं। पहली धारा विदेशी नागरिकों की मौजूदगी पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है, जबकि दूसरी धारा कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद उन्हें देश से बाहर भेजने का प्रावधान करती है।

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