बैतूल , जुलाई 30 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में 306 जर्जर शासकीय स्कूल भवन बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। जिला शिक्षा केंद्र द्वारा कई माह पहले इन भवनों की सूची लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भेजे जाने के बावजूद अधिकांश भवनों का ध्वस्तीकरण शुरू नहीं हो सका है। लगातार हो रही बारिश के बीच इन भवनों के गिरने की आशंका बढ़ने से अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता व्याप्त है।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में कुल 306 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इन भवनों की स्थिति ऐसी है कि उनकी मरम्मत कर दोबारा उपयोग में लाना संभव नहीं है। विभाग ने अधिकांश स्थानों पर नए स्कूल भवन बनाकर कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया है, लेकिन पुराने भवन अब भी परिसर या उसके आसपास खड़े हैं।
आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 73 जर्जर भवन भीमपुर विकासखंड में तथा सबसे कम नौ भवन आमला विकासखंड में स्थित हैं। जिला शिक्षा केंद्र ने इन भवनों की सूची ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए कई माह पहले पीडब्ल्यूडी को भेज दी थी।
नियमानुसार पीडब्ल्यूडी द्वारा निरीक्षण के बाद कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त कर भवनों का ध्वस्तीकरण कराया जाता है। हालांकि अब तक 306 भवनों में से केवल छह के ध्वस्तीकरण के लिए ही अनुमोदन लिया जा सका है और किसी भी भवन को अभी तक नहीं गिराया गया है।
लगातार वर्षा के कारण जर्जर भवनों की दीवारें और छतें और कमजोर हो गई हैं। अधिकांश भवन नए स्कूल परिसरों के भीतर या उनके निकट होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। अवकाश के दौरान बच्चों के इन भवनों के आसपास जाने की आशंका भी बनी रहती है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से जर्जर भवनों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र ध्वस्त कराने की मांग की है। वहीं जिला प्रशासन ने मामले की समीक्षा की बात कही है, लेकिन ध्वस्तीकरण की धीमी गति पर सवाल उठ रहे हैं।
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