बैतूल , सितंबर 02 -- मध्यप्रदेश के बैतूल शहर में मंगलवार शाम 'बेटी हुई है' लिखी गाड़ियों का काफिला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बाद में पता चला कि यह किसी प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रजापति परिवार में करीब 34-35 साल बाद जन्मी बेटी के स्वागत में निकाला गया जश्न था।

कंपनी गार्डन क्षेत्र निवासी मूर्तिकार सुनील प्रजापति और उनकी पत्नी निधि प्रजापति के घर 29 अगस्त को बेटी का जन्म हुआ। एक सितंबर को नवजात को अस्पताल से घर लाने के लिए परिजन आधा दर्जन से अधिक वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे। सभी वाहनों पर 'बेटी हुई है' लिखवाया गया था। अस्पताल से घर तक काफिला शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। घर पहुंचने पर आतिशबाजी के साथ बेटी का गृहप्रवेश कराया गया।

सुनील प्रजापति ने बताया कि वह देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। लंबे समय से बेटी की इच्छा थी और इसके लिए उन्होंने कई मन्नतें भी मांगी थीं। करीब 34-35 साल बाद परिवार में बेटी का जन्म होने से उन्होंने उसके स्वागत को विशेष बनाने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि बेटी के स्वागत का उद्देश्य परिवार की खुशी के साथ समाज को यह संदेश देना भी है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार की खुशी है। बेटियों को बेटों की तरह शिक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना चाहिए।

निधि प्रजापति ने कहा कि बेटी के जन्म से पूरा परिवार खुश है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को अच्छी शिक्षा देने और उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ाने में परिवार कोई कमी नहीं छोड़ेगा। बेटी के दादा राजू किशन प्रजापति ने बताया कि उनके तीनों बेटों के घर अब तक बेटी नहीं हुई थी। वर्षों से उन्हें पोती का इंतजार था। उन्होंने पोती के जन्म को परिवार के लिए सौभाग्य बताया।

परिवार के अनुसार बेटी के स्वागत में निकाला गया काफिला समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच का संदेश देने का प्रयास है। परिवार का कहना है कि बेटी के जन्म को बोझ समझने के बजाय खुशी और गर्व के साथ मनाया जाना चाहिए।

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