बैतूल , जुलाई 11 -- मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के विधानसभा क्षेत्र आठनेर में सरकारी नियमों को दरकिनार कर 62 लाख रुपये के इंडोर स्टेडियम का निर्माण शुरू किए जाने का मामला सामने आने से नगर परिषद में हड़कंप मच गया।
मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना के तहत वार्ड क्रमांक नौ में बनने वाले इस स्टेडियम का निर्माण कार्य ठेका एजेंसी ने बिना अनुबंध और बिना विधिवत कार्यादेश के ही शुरू कर दिया। मामला सामने आने के बाद नगर परिषद ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पहले ठेका एजेंसी से आवश्यक गारंटी राशि जमा कराई, फिर अनुबंध पूरा कर कार्यादेश जारी किया।
जानकारी के मुताबिक ठेका एजेंसी ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। यदि मामला समय रहते सामने नहीं आता तो नगर परिषद को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी होने पर परिषद के पास ठेकेदार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का आधार भी नहीं रहता।
बताया गया है कि ठेका एजेंसी ने लगभग 20 प्रतिशत कम दर पर ठेका हासिल किया था। ऐसे मामलों में शासन के नियमों के अनुसार अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी और परफॉर्मेंस गारंटी जमा कराना अनिवार्य होता है। लेकिन एजेंसी ने यह राशि जमा किए बिना ही निर्माण शुरू कर दिया। मामला उजागर होने के बाद शुक्रवार को पूरे दिन चली प्रशासनिक कवायद के बाद एजेंसी से 6.11 लाख रुपये अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी और 1.58 लाख रुपये परफॉर्मेंस गारंटी नगर परिषद के खाते में जमा कराई गई। इसके बाद अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश जारी किया गया।
नगर परिषद आठनेर के उपयंत्री बलराम कुशवाहा ने बताया कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए निर्माण शुरू कर दिया गया है, तत्काल काम रुकवा दिया गया। उन्होंने कहा कि अब सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कार्य दोबारा शुरू कराया गया है। ठेकेदार को 12 माह के भीतर प्राक्कलन के अनुसार गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपयंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण स्थल की खुदाई से निकली सामग्री का उपयोग नहीं होने दिया जाएगा। प्राक्कलन में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार ही निर्माण कराया जाएगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। नगर परिषद ने ठेका एजेंसी को सात अप्रैल को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर गारंटी राशि जमा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन एजेंसी ने दो महीने से अधिक समय तक राशि जमा नहीं की। इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई और वह निर्माण कार्य शुरू करने में सफल रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब एजेंसी ने नोटिस की भी अनदेखी की तो नगर परिषद प्रशासन ने समय रहते सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की।
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